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उज्जैन, 24 अक्टूबर । मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के चार बजे भस्म आरती के लिए भगवान महाकाल के पट खोले गए। मंदिर की परंपरा के अनुसार सबसे पहले गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। प्रथम घंटाल बजने के बाद भगवान को हरि ओम का जल अर्पित किया गया।
पूजन के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक शृंगार किया गया। बाबा को रजत ॐ, बिल्वपत्र, रजत मुकुट और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। भगवान के मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल सजाया गया। इसके साथ ही डमरू, शेषनाग स्वरूप रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और सुगंधित पुष्पों की माला से बाबा का शृंगार किया गया। रजत आभूषणों और रुद्राक्ष की माला से सजे भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से अर्पित की गई भस्म
भस्म आरती से पहले भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। कपूर आरती के बाद नैवेद्य अर्पित किया गया और महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। भस्म अर्पण के साथ ही आरती की परंपरा पूरी की गई।
जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर
धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन का विशेष महत्व है। भस्म आरती में शामिल श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। बाबा महाकाल के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।
