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ई-कॉमर्स डिलीवरी पर जीएसटी को तर्कसंगत बनाने की पहल का इंडिया एसएमई फोरम ने किया स्वागत, एमएसएमई के लिए निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की दिशा में बताया बड़ा कदम
इंडस्ट्री संगठन के अनुसार, प्रस्तावित एकरूप कर व्यवस्था से विक्रेताओं की लंबे समय से चली आ रही चिंता का हल निकलेगा। जीएसटी संवाद के दौरान उठाए गए इस मुद्दे के समाधान से लागत का बेहतर अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी और डिलीवरी के अलग-अलग तरीकों के बीच बराबरी के मौके की मांग को मजबूती मिलेगी।
नई दिल्ली: इंडिया एसएमई फोरम (आईएसएफ) ने जीएसटी परिषद की उस सिफारिश का स्वागत किया है, जिसमें ई-कॉमर्स ऑपरेटरों (ईसीओ) के जरिए दी जाने वाली डिलीवरी सेवाओं पर जीएसटी व्यवस्था को तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव है। फोरम के मुताबिक यह छोटे कारोबारियों और ई-कॉमर्स विक्रेताओं की लंबे समय से चली आ रही चिंता के हल की ओर बड़ा कदम है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ई-कॉमर्स ऑपरेटरों के जरिए दी जाने वाली डिलीवरी सेवाओं पर बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के 5% जीएसटी या आईटीसी के साथ 18% जीएसटी लगेगा। इसका मकसद ऐसी सेवाओं पर कर की ज्यादा एकरूप व्यवस्था लागू करना और कारोबार व लॉजिस्टिक्स के अलग-अलग तरीकों के कारण पैदा हुए अंतर को खत्म करना है।
डिजिटल मार्केटप्लेस के जरिए सामान बेचने वाले छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए लॉजिस्टिक्स का खर्च यह तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है कि वे बाजार में कितनी मजबूती से मुकाबला कर पाएंगे। डिलीवरी के अलग-अलग तरीकों पर अलग कर व्यवस्था के कारण लागत को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। साथ ही यह चिंता भी रहती है कि एक ही क्षेत्र में काम करने वाले कारोबारियों को बराबरी के मौके मिल रहे हैं या नहीं। जीएसटी परिषद की सिफारिश ज्यादा साफ और एक जैसी कर व्यवस्था बनाकर इस बुनियादी समस्या का हल निकालती है।
यह प्रस्ताव भारत के तेजी से बदलते डिजिटल कारोबार की एक बड़ी ढांचागत चिंता का भी जवाब है। ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस, स्वतंत्र विक्रेता, लॉजिस्टिक्स कंपनियां और ग्राहकों तक सामान पहुंचाने वाले नेटवर्क आपस में गहराई से जुड़े हैं। मिलती-जुलती सेवाओं पर एक जैसी कर व्यवस्था से डिलीवरी के अलग-अलग तरीकों के बीच असमानता कम हो सकती है। इससे कारोबारियों को लंबी अवधि के फैसलों के लिए कहीं साफ और न्यायसंगत आधार मिलेगा।
इंडिया एसएमई फोरम के प्रेसिडेंट विनोद कुमार ने कहा, “छोटे कारोबारियों के लिए किसी उत्पाद को ग्राहक तक पहुंचाने का खर्च उतना ही अहम है, जितना उसे बनाने का खर्च। पिछले डेढ़ साल से हमारे विक्रेता अलग-अलग शहरों में जीएसटी संवाद के दौरान ई-कॉमर्स डिलीवरी सेवाओं पर जीएसटी की दरों में अंतर और इससे पैदा होने वाली अनिश्चितता का मुद्दा लगातार उठाते रहे हैं। जब मिलती-जुलती सेवाएं देने वाले कारोबारियों पर उनके काम करने के तरीके के आधार पर अलग-अलग कर लगते हैं, तो प्रतिस्पर्धा में बराबरी नहीं रह जाती और लंबे समय की योजना बनाना मुश्किल हो जाता है। जीएसटी परिषद की यह सिफारिश इस समस्या के समाधान की दिशा में अहम कदम है। ज्यादा एकरूप और स्थिर कर व्यवस्था से विक्रेता लॉजिस्टिक्स, कीमतों और कारोबार के विस्तार को लेकर सोच-समझकर फैसले ले सकेंगे। साथ ही ई-कॉमर्स के जरिए कारोबार करने वाले एमएसएमई की प्रतिस्पर्धा करने की ताकत भी बढ़ेगी।”
त्योहारों का मौसम नजदीक होने के कारण इस सिफारिश की अहमियत और बढ़ जाती है। यह समय भारत में ई-कॉमर्स कारोबार के लिए साल के सबसे व्यस्त दिनों में गिना जाता है। लाखों छोटे कारोबारी ऑनलाइन मार्केटप्लेस के सहारे दूसरे राज्यों और अपने पारंपरिक बाजारों से बाहर के ग्राहकों तक पहुंचते हैं। इस दौरान बढ़ती मांग को पूरा करने, स्टॉक की योजना बनाने और मुनाफे का हिसाब रखने के लिए लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सरल और स्थिर व्यवस्था जरूरी है।
इंडिया एसएमई फोरम का कहना है कि इस सिफारिश को जीएसटी परिषद की उन व्यापक पहलों के साथ देखा जाना चाहिए, जिनका मकसद अनुपालन को आसान बनाना और एमएसएमई के लिए कारोबार करना सरल बनाना है। इनमें इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत जमा इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिफंड में राहत, जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना और कारोबार के मुख्य स्थान से जुड़ी शर्तों में ढील जैसे कदम शामिल हैं। ये कदम अनुपालन का बोझ घटाने, कारोबार के लिए वर्किंग कैपिटल बढ़ाने और छोटे उद्यमों को अपना कारोबार बढ़ाने के साथ भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में ज्यादा असरदार भागीदारी के लिए अहम हैं।
इंडिया एसएमई फोरम ने कहा कि वह इन सिफारिशों को एमएसएमई के लिए व्यावहारिक और आसानी से मिलने वाले फायदों में बदलने के लिए नीति-निर्माताओं के साथ बातचीत जारी रखेगा। इसके लिए अमल के साफ दिशा-निर्देश और सरल प्रक्रियाएं जरूरी हैं, ताकि छोटे कारोबारी अपना कारोबार बढ़ा सकें, मुकाबला कर सकें और भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में बेहतर ढंग से अपनी जगह बना सकें।
