VIP Visit : अगले 15 दिन रहेंगे खास, छत्तीसगढ़ आएंगे राष्ट्रपति मुर्मू और मोहन भागवत, राज्योत्सव में अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि
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मुंबई | 7 अक्टूबर 2026: सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए), एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड, सॉलिडेरिडाड नेटवर्क एशिया लिमिटेड और भारतखंड फाउंडेशन ने मिलकर ‘सरसों संकल्प’ की शुरुआत की है। यह पांच साल का किसान-केंद्रित कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य राजस्थान के बूंदी, टोंक और झालावाड़ जिलों में पुनर्योजी सरसों खेती को बढ़ावा देना है।एडब्ल्यूएल के कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) कार्यक्रम के तहत संचालित ‘सरसों संकल्प’ में किसानों और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के दीर्घकालिक स्वास्थ्य को सरसों की खेती के केंद्र में रखा गया है। कार्यक्रम के तहत मिट्टी की सेहत, जलवायु अनुकूलन क्षमता, पानी और कृषि इनपुट के बेहतर इस्तेमाल, जैव विविधता और खेत स्तर पर उत्पादकता व अन्य परिणामों में सुधार के लिए व्यावहारिक उपायों को बढ़ावा दिया जाएगा।इस संबंध में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हाल ही में द वेस्टिन मुंबई, पवई लेक में आयोजित SEA की वार्षिक आम बैठक और वार्षिक पुरस्कार समारोह के दौरान हस्ताक्षर किए गए।कार्यक्रम की शुरुआत वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 15,000 सक्रिय किसानों को जोड़ने के लक्ष्य के साथ होगी। इसके बाद वित्त वर्ष 2030-31 तक इसका दायरा बढ़ाकर 40,000 किसानों तक किया जाएगा। कार्यक्रम का कुल बजट 16 करोड़ रुपये रखा गया है।सरसों संकल्प के केंद्र में पुनर्योजी खेतीसिर्फ अलग-अलग खेतों में खेती की तकनीकों पर ध्यान देने के बजाय ‘सरसों संकल्प’ को एक एकीकृत किसान सहायता कार्यक्रम के रूप में तैयार किया गया है। इसमें प्रशिक्षण, प्रदर्शन, मॉडल फार्म, मिट्टी और फसल संबंधी सलाह, खेत स्तर पर विस्तार सेवाएं, किसान रिकॉर्ड, निगरानी और प्रदर्शन संकेतकों का आकलन शामिल होगा।कार्यक्रम के तहत मॉडल और प्रदर्शन फार्म स्थापित किए जाएंगे, जो स्थानीय स्तर पर सीखने के केंद्र के रूप में काम करेंगे। इनके माध्यम से किसान पुनर्योजी खेती की तकनीकों को वास्तविक खेतों में देख सकेंगे, परिणामों की तुलना कर सकेंगे और खेत आधारित अनुभवों से सीख सकेंगे।प्रमुख क्षेत्रों में होगा हस्तक्षेप• मिट्टी की सेहत और फसल पोषण में सुधार• पानी और कृषि इनपुट के कुशल इस्तेमाल को बढ़ावा देना• सरसों आधारित खेती प्रणालियों की जलवायु अनुकूलन क्षमता मजबूत करना• जैव विविधता और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने वाली तकनीकों को प्रोत्साहित करना• स्थानीय जरूरतों के अनुरूप मिट्टी और फसल संबंधी सलाह उपलब्ध कराना• किसानों के ज्ञान और खेत स्तर की विस्तार सेवाओं को मजबूत करना• प्रमाण आधारित विस्तार के लिए खेत स्तर के परिणामों की निगरानी और मापन करनापुनर्योजी कृषि के लिए सहयोगात्मक मॉडलइस साझेदारी के तहत एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड सीएसआर सहायता उपलब्ध कराएगा, जबकि SEA कार्यक्रम के समन्वय और गुणात्मक निगरानी में सहयोग करेगा। सॉलिडेरिडाड पुनर्योजी कृषि के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता, कार्यक्रम संबंधी मार्गदर्शन, गुणवत्ता आश्वासन तथा ज्ञान और सीखने से जुड़ा सहयोग देगा। भारतखंड फाउंडेशन प्रमुख मैदानी कार्यान्वयन साझेदार के रूप में काम करेगा।इस पहल पर एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डिप्टी चेयरमैन अंशु मलिक ने कहा, “सरसों संकल्प के जरिए एडब्ल्यूएल का सीएसआर कार्यक्रम किसानों, बेहतर मिट्टी की सेहत और मजबूत कृषि समुदायों में निवेश कर रहा है। यह साझेदारी व्यावहारिक पुनर्योजी समाधानों को प्रदर्शित करने और यह मापने के लिए दीर्घकालिक मंच उपलब्ध कराती है कि वे खेत स्तर के परिणामों में किस तरह सुधार करते हैं।”एसईए के अध्यक्ष (2024-26) संजीव अस्थाना ने कहा, “सरसों संकल्प दिखाता है कि खाद्य तेल उद्योग किस तरह व्यवस्थित सीएसआर कार्यक्रम के जरिए व्यापक स्तर पर, जवाबदेही और मापने योग्य मैदानी परिणामों के साथ कृषि समुदायों का समर्थन कर सकता है। एसईए को ऐसे मॉडल के लिए साझेदारों को एक साथ लाने की खुशी है, जो किसानों को मजबूत करने के साथ भारत की तिलहन आत्मनिर्भरता में योगदान दे सकता है।”एसईए के कार्यकारी निदेशक डॉ. बी. वी. मेहता ने कहा, “यह कार्यक्रम किसान संपर्क, मॉडल फार्म, पुनर्योजी खेती की तकनीकों, मैदानी सलाह और प्रदर्शन के आकलन को एक ही कार्यान्वयन ढांचे में लाता है। इसकी वास्तविक ताकत मैदानी स्तर पर काम की गुणवत्ता और ऐसे प्रमाण तैयार करने में होगी, जिनके आधार पर सरसों क्षेत्र में इन तकनीकों को बड़े स्तर पर अपनाया जा सके।”सॉलिडेरिडाड नेटवर्क एशिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. शतद्रु चट्टोपाध्याय ने कहा, “जब किसानों को व्यावहारिक सहयोग, स्थानीय जरूरतों के अनुरूप ज्ञान और लगातार मार्गदर्शन मिलता है, तभी पुनर्योजी कृषि लंबे समय तक मूल्य पैदा करती है। यह साझेदारी बेहतर कृषि तकनीकों को मिट्टी की सेहत, संसाधन दक्षता, जलवायु अनुकूलन क्षमता और किसान कल्याण के क्षेत्र में मापने योग्य परिणामों में बदलने के लिए तैयार की गई है।”सॉलिडेरिडाड के महाप्रबंधक और एसईए-सॉलिडेरिडाड सस्टेनेबल ऑयलसीड मिशन के समन्वयक डॉ. सुरेश मोटवानी ने कहा, “हमारी प्राथमिकता पुनर्योजी सरसों खेती को खेत स्तर पर सार्थक बनाना है। इसके तहत मिट्टी की सेहत, जलवायु अनुकूलन क्षमता, उत्पादकता, संसाधन दक्षता और भविष्य के जलवायु एवं उत्पादन जोखिमों से निपटने के लिए किसानों की क्षमता में सुधार पर ध्यान दिया जाएगा।”‘सरसों संकल्प’ का उद्देश्य यह प्रदर्शित करना है कि पुनर्योजी सरसों खेती को अलग-अलग उपायों तक सीमित रखने के बजाय एक व्यावहारिक, मापने योग्य और बड़े स्तर पर अपनाई जा सकने वाली व्यवस्था बनाया जा सकता है। इससे मिट्टी की सेहत मजबूत करने, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल, जलवायु अनुकूलन क्षमता बढ़ाने और किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद मिलेगी।
