Aaj ka Panchang 17 October 2026: शारदीय नवरात्रि के 7वें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूरा पंचांग
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नई दिल्ली: (ऊषा माहना/ माधव एक्सप्रेस)नींव दिल्ली फोर्सेस’ द्वारा रफ़ी मार्ग स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में पोषण माह पर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 68 सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।कार्यक्रम में दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश व्यास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके अलावा ‘नापी नेटवर्क’ की डॉ. नूपुर बिड़ला, ‘नेशनल फोर्सेस’ की डॉ. अपराजिता शर्मा, ‘NCCM’ के अमरीश दुबे, ‘राइट टू फूड’ की अशिया और ‘नींव दिल्ली फोर्सेस’ के संयोजक अवधेश यादव सहित कई प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे।मुख्य विषय और चर्चाएंकार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य बच्चों के पोषण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं विकास (ECCD), घर के बने पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने तथा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के उपयोग को कम करने पर रणनीति बनाना था।सतत प्रयासों की आवश्यकता: डॉ. ओ.पी. व्यास ने कहा कि बच्चों और महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना सरकार, सामाजिक संगठनों और समुदाय की साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने पोषण माह की गतिविधियों को केवल एक महीने तक सीमित न रखकर निरंतर जारी रखने और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी पर जोर दिया।क्रेच नीति की मांग: बैठक में निर्माण श्रमिकों, घरेलू कामगारों और कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए सुरक्षित देखभाल सुविधाओं की आवश्यकता रेखांकित की गई। प्रतिनिधियों ने दिल्ली में एक प्रभावी क्रेच नीति (‘पालना नीति’) तैयार करने और मौजूदा 611 क्रेच सुविधाओं को और मजबूत करने की मांग की।जागरूकता अभियान: प्रथम सत्र में अवधेश यादव ने बताया कि 32 गैर-सरकारी संगठनों ने 33 क्षेत्रों में मिलकर 4,500 से अधिक लोगों को अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया है।पैनल चर्चा और प्रमुख सुझावपैनल चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने बाल अधिकार, खाद्य सुरक्षा और विज्ञापनों के नियमन पर अपने विचार साझा किए:स्पष्ट चेतावनी लेबल: खाद्य पैकेटों पर सामग्री, चीनी और वसा की मात्रा स्पष्ट हिंदी में लिखने और चेतावनी लेबल लगाने की मांग की गई।विज्ञापन नियमन: बच्चों को लक्षित करने वाले अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के विज्ञापनों पर प्रभावी नियंत्रण की सिफारिश की गई।जनसुनवाई और शोध: DCPCR के सहयोग से पोषण और बच्चों के अधिकारों पर विभिन्न क्षेत्रों में जनसुनवाई आयोजित करने तथा स्थानीय खाद्य परंपराओं पर संयुक्त शोध करने का निर्णय लिया गया।बजट और संसाधन: ‘राइट टू फूड’ की अशिया ने पोषण और मिड-डे मील के लिए पर्याप्त बजटीय संसाधन सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।कार्यक्रम का समापन वार्षिक प्रतिवेदन और वेबसाइट के शुभारंभ के साथ हुआ। बैठक में निष्कर्ष निकाला गया कि बच्चों के समग्र विकास और पोषण के लिए समाज और सरकार को मिलकर निरंतर काम करना होगा।
