नक्सलवाद से मिले घावों पर मरहम लगाकर हर पीड़ित को सम्मानपूर्ण जीवन देना हमारा संकल्प : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
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न्यू दिगंबर पब्लिक स्कूल ने जीता प्रथम पुरस्कार* क्रिश्चियन एमिनेंट स्कूल रहा द्वितीय स्थान पर एवं छत्रपति शिवाजी पब्लिक स्कूल को मिला तृतीय पुरस्कार
इंदौर, 15 अक्टूबर 2026। लोग गुजर जाते हैं लेकिन उनकी दी हुई सीख हमेशा याद रहती है, प्रेरित करती है। महात्मा गांधी और विनोबा भावे के सिद्धांतों से प्रेरित, “दादा सा” के नाम से प्रसिद्ध स्व. श्री मोरेश्वर वामन मोघे (दादा सा) अपने आदर्शों, समाजसेवा और मानवीय मूल्यों के लिए सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनकी पुण्यतिथि पर प्रतिवर्ष पागनिसपागा स्थित बाल निकेतन संघ में विशेष आयोजन कर उनके विचारों को जीवंत किया जाता है। बाल निकेतन संघ की सचिव डॉ. नीलिमा अदमणे, प्राचार्य श्री संदीप धाकड़ एवं मुख्य अतिथियों ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए पुरस्कार एवं स्मृति चिन्ह भेंट किए।इस वर्ष दादा सा की 21 वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित अंतर्विद्यालयीन सामूहिक भजन प्रतियोगिता में शहर के 21 विद्यालयों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह प्रतियोगिता गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को बाल निकेतन संघ परिसर में संपन्न हुई। प्रतियोगिता में इसमें न्यू दिगंबर पब्लिक स्कूल ने प्रथम, क्रिश्चियन एमिनेंट स्कूल ने द्वितीय और छत्रपति शिवाजी पब्लिक स्कूल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं, वैष्णव एकेडमी को प्रथम और पिंक फ्लावर स्कूल को द्वितीय सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने भक्ति संगीत की विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी गायन प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में ‘पालकी चलो उठाए’, ‘चदरिया झीनी रे झीनी’, ‘राम राम श्रीराम’, ‘जय हनुमान’, ‘मैली चादर ओढ़ के’, ‘आ जाइयो’, ‘करुणा के तुम सागर’ और ‘राम भजन कर’ जैसे भजनों की प्रस्तुतियां दी गईं। सामूहिक गायन में विद्यार्थियों ने सुर, ताल और आपसी समन्वय के साथ भक्ति भाव को अभिव्यक्त किया। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ ही भारतीय संगीत परंपरा से जुड़ने का अवसर मिला।प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में शास्त्रीय गायिका श्रीमती रसिका गावड़े, गायक एवं संगीतकार मयंक कुमार स्वर्णकार तथा सरोद वादक चिन्मय विंचुरकर शामिल रहे। निर्णायकों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन गायन, सुर-ताल, लय, सामूहिक समन्वय और प्रस्तुति की गुणवत्ता के आधार पर किया।*इस अवसर पर निर्णायक मंडल ने संयुक्त रूप से कहा,* “सामूहिक भजन गायन विद्यार्थियों में संगीत की समझ विकसित करने के साथ अनुशासन, एकाग्रता और आपसी समन्वय की भावना को भी मजबूत करता है। ऐसे आयोजन बच्चों को भारतीय संस्कृति और भक्ति संगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में उत्साह और संगीत के प्रति समर्पण देखने को मिला।”*बाल निकेतन संघ की सचिव डॉ. नीलिमा अदमणे ने कहा,* “स्वर्गीय श्री मोरेश्वर वामन मोघे दादा सा की स्मृति में आयोजित यह प्रतियोगिता उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। बाल निकेतन संघ का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को मंच प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, भक्ति संगीत और संस्कारों से जोड़ना भी है। दादा सा की स्मृति को सहेजते हुए हम चाहते हैं कि नई पीढ़ी हमारी संगीत परंपरा को समझे, उसका सम्मान करे और उसे आगे बढ़ाए। सामूहिक भजन गायन बच्चों में अनुशासन, एकाग्रता और एकजुटता की भावना विकसित करता है। प्रतियोगिता में शामिल सभी विद्यार्थियों का उत्साह सराहनीय रहा।”
