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नई दिल्ली, 12 अक्टूबर । केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अस्पतालों सहित सभी नैदानिक प्रतिष्ठानों (क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट) में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं की दरें प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के संभावित खर्च की स्पष्ट जानकारी देना, उन्हें सोच-समझकर निर्णय लेने में सक्षम बनाना और बिलिंग से जुड़े विवादों को कम करना है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सोमवार को इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर संबंधित नियमों के अनुपालन की समीक्षा करने और आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।
पत्र में पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं की दरों से जुड़ी जानकारी ऐसी जगह पर प्रदर्शित होनी चाहिए, जहां मरीज और उनके तीमारदार इसे आसानी से देख और समझ सकें। स्वास्थ्य सचिव ने अपने पत्र में क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (केंद्र सरकार) नियम, 2012 का उल्लेख किया है। इन नियमों के तहत जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अधिनियम लागू है, वहां नैदानिक प्रतिष्ठानों को प्रत्येक प्रकार की सेवा और उपलब्ध सुविधा के लिए ली जाने वाली दरें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होती हैं। यह जानकारी स्थानीय भाषा के साथ अंग्रेजी में भी उपलब्ध होनी चाहिए ताकि मरीज और उनके परिजन इलाज से संबंधित खर्च को समझ सकें।
उन्होंने कहा कि
जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अधिनियम लागू नहीं है, वहां स्वास्थ्य संस्थानों का नियमन संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के कानूनों के तहत किया जाता है। इनमें से कई व्यवस्थाओं में भी स्वास्थ्य सेवाओं की दरें प्रदर्शित करने के प्रावधान हैं।
राज्यों को अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी
स्वास्थ्य सचिव ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और संबंधित नियमों के क्रियान्वयन एवं निगरानी की जिम्मेदारी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की है। ऐसे में मुख्य सचिवों से कहा गया है कि वे संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करें और स्वास्थ्य संस्थानों में नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराएं।
विदेशी मरीजों के लिए भी पैकेज दरें प्रदर्शित करने पर जोर
मंत्रालय ने भारत में इलाज के लिए आने वाले विदेशी मरीजों के हितों को भी ध्यान में रखा है।
पत्र में कहा गया है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मेडिकल वीजा और आयुष वीजा पर भारत आने वाले विदेशी मरीजों के लिए उपलब्ध उपचार पैकेज की दरें भी, जहां लागू हो, प्रमुखता से प्रदर्शित करने को प्रोत्साहित करने का अनुरोध किया गया है।
इससे विदेशी मरीजों को इलाज के विकल्प चुनने से पहले खर्च की जानकारी मिल सकेगी और कीमतों तथा बिलिंग से जुड़ी शिकायतों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, भारत को चिकित्सा और आयुष उपचार के विश्वसनीय केंद्र के रूप में स्थापित करने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
