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नई दिल्ली, 12 अक्टूबर । साकेत कोर्ट ने श्रद्धा मर्डर केस में व्हाट्स ऐप, गूगल और बम्बल के विदेश में रहने वाले चार नोडल अधिकारियों की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए रिकॉर्ड करने की इजाजत दे दी है। एडिशनल सेशंस जज हरगुरविंदर सिंह जग्गी ने यह आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई आगामी एक दिसंबर को होगी।
दिल्ली पुलिस ने जिन चार गवाहों को पेश करने की अनुमति मांगी थी, वे सभी बड़ी टेक कंपनियों से जुड़े हैं। इनमें व्हाट्सऐप और मेटा प्लेटफॉर्म्स के नोडल अधिकारी एड्रियन सिल्वेरा, गूगल के नोडल अधिकारी शेल्बी स्मिथ, जीमेल से जुड़ी नोडल अधिकारी आरती सेठ और बम्बल ग्रुप के नोडल अधिकारी व कानून प्रवर्तन संचालन प्रबंधक ल्यूक मित्सी शामिल हैं। ये अधिकारी अमेरिका और ब्रिटेन में रहते या काम करते हैं। इस मामले में कोर्ट अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान दर्ज कर रहा है।
साकेत कोर्ट ने 9 मई, 2023 को इस मामले के आरोपित आफताब के खिलाफ हत्या करने का आरोप तय कर दिया था। कोर्ट ने आफताब पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 201 ( सबूतों को नष्ट करने) के तहत आरोप तय किये थे। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि आफताब ने सोच समझ कर इस घटना को अंजाम दिया है। दिल्ली पुलिस ने कहा था कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य से पता चलता है कि श्रद्धा और आफ़ताब का लिव-इन रिलेशन हिंसक था। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि श्रद्धा प्रैक्टो ऐप के जरिये डॉक्टरों से परामर्श भी ले रही थी। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में श्रद्धा की काउंसलिंग का वीडियो प्ले कर दिखाया था जिसमें श्रद्धा कह रही है कि आफताब उसको खोज लेगा और मार देगा।
साकेत कोर्ट ने 7 फरवरी, 2023 को दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया था। 24 जनवरी, 2023 को दिल्ली पुलिस ने 6629 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में आफताब को एकमात्र आरोपित बनाया गया है। चार्जशीट में करीब सौ गवाहों के अलावा फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को आधार बनाया गया है।
आफताब ने श्रद्धा की हत्या कर करीब 30 टुकड़े कर दिए थे। उसके शव के टुकड़ों को फ्रीज में रखा हुआ था। वो शव के अंगों को अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर फेंकता था। बाद में पुलिस ने आफताब की निशानदेही पर श्रद्धा के कई अंगों को बरामद किया।
