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भोपाल, 12 अक्टूबर । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज (सोमवार) से सात दिवसीय ‘अंतराष्ट्रीय श्रीराम लीला उत्सव’ शुरू हो रहा है। यहां रविन्द्र भवन में शाम 7 बजे मुक्ताकाश मंच पर इसका शुभारंभ होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मौजूद रहेंगे। प्रबुद्ध विचारक डॉ. इंद्रेश कुमार, संस्कृति मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी और संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगी।
संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास, संस्कृति विभाग द्वारा संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली के सहयोग रविंद्र भवन में आयोजित यह उत्सव 18 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें 10 से ज्यादा कला और विधाओं में प्रसंग होंगे। विदेशी विद्वान और कलाकार भी इसमें हिस्सा लेंगे।
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव इस वर्ष न सिर्फ लीला प्रदर्शन तक सीमित रहेगा, बल्कि विविध कला विधाओं के माध्यम से श्रीरामकथा प्रसंगों को प्रदर्शित करेगा। इसमें लीला प्रदर्शन के साथ ही बौद्धिक सत्र, स्टोरी टेलिंग सेशन, प्रदर्शिनियां, कला शिविर, कला कार्यशाला, कठपुतली प्रदर्शन, भजन जैमिंग केन्द्रित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इस प्रतिष्ठित उत्सव में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर एवं भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद नई दिल्ली का भी सहयोग प्राप्त हो रहा है।
श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास के सीईओ एनपी नामदेव ने बताया कि श्रीरामलीला उत्सव में प्रतिदिन अलग-अलग नृत्य शैली में श्रीरामकथा के अलग-अलग प्रसंगों को प्रदर्शित किया जा रहा है। यह पहला अवसर है जब भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों में रामकथा के प्रसंगों का प्रदर्शन होगा। नृत्य की संरचनाओं, भूमिकाओं, भाव-भंगिमाओं, देह गतियों एवं पारंपरिक संगीत के साथ राम जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक के प्रसंग दर्शकों को दिव्य आनंद से भर देंगे।
उन्होंने बताया कि पहले दिन जवाहरलाल नेहरू मणिपुर नृत्य अकादमी इंफाल मणिपुर के कलाकारों द्वारा मणिपुरी नृत्य शैली में नारद मोह, श्रीराम जन्म, विद्या अभ्यास एवं ताड़वा वध होगा। रात 9 बजे से हृदय बैंड, भोपाल द्वारा भजन जैमिंग की प्रस्तुति होगी। दूसरे दिन 13 अक्टूबर को सत्रिया केंद्र गुवाहाटी असम के कलाकारों द्वारा सत्रिया नृत्य शैली में अहल्या उद्धार, पुष्प वाटिका, सीता स्वयंवर एवं लक्ष्मण परशुराम संवाद होगा।
14 अक्टूबर को पूर्वरंग में चण्डूला कृष्णैया बुंदम, तेलंगाना द्वारा चंडू भागवतम में सीताहरण, श्रीराम-सुग्रीव मिलन, सुग्रीव-हनुमान संवाद, लंका दहन के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके बाद कथक केंद्र नई दिल्ली के कलाकार कथक नृत्य शैली में श्रीराम विवाह, सीता विदाई, मंथरा-कैकई संवाद, दशरथ-कैकई संवाद, श्रीराम वनवास, केवट प्रसंग एवं भरत मिलाप होगा।
15 अक्टूबर को पूर्वरंग में श्री रामाकेन दल, थाईलैंड द्वारा खोन नृत्य शैली जो यूनेस्को अमूर्त धरोहर है, में सीमा हरण, राम-रावण युद्ध प्रदर्शित किया जाएगा। कुटियाट्टम केंद्र तिरुवनंतपुरम के कलाकार कुटियाट्टम नृत्य शैली में अनुसुइया उपदेश, पंचवटी प्रसंग, सीता हरण, जटायु वध एवं श्रीराम प्रतिज्ञा की प्रस्तुति देंगे।
16 अक्टूबर को पूर्वरंग में विभूति श्रीनिवास राजू चंडू यक्षगान बुंधम, आंध्रप्रदेश द्वारा यक्षगान शैली में महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, सीता स्वयंवर, श्रीराम वनवास एवं श्रीराम-रावण युद्ध की प्रस्तुति होगी। इसके बाद गुरु केलुचरण महापात्र ओडिसी नृत्यबसा, ओडिशा के कलाकारों द्वारा ओडिसी नृत्य शैली में शबरी प्रसंग, श्रीहनुमान लीला, बालि वध, लंका दहन, विभीषण शरणागत, रावण-अंगद संवाद, लक्ष्मण मूर्छा एवं कुंभकरण वध की प्रस्तुति होगी।
17 अक्टूबर को पूर्वरंग में पद्मश्री गेनादी पेचनीकोव स्मृति दिशा रामलीला, मास्को, रूस के कलाकारों द्वारा सीता स्वंयवर, श्रीराम का अयोध्या में स्वागत, सीता हरण, लंका में सीता, श्रीराम – रावण युद्ध की प्रस्तुति होगी। इसके बाद छऊ केन्द्र, झारखंड के कलाकारों द्वारा छऊ नृत्य शैली में मेघनाद वध एवं श्रीराम-लक्ष्मण हरण प्रसंग प्रस्तुत होंगे।
18 अक्टूबर को पूर्वरंग में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल के संस्कृत रंगमंडल प्रभाग द्वारा हिंदी एवं संस्कृत भाषा पर नाटक रामत्रयी की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके बाद कलाक्षेत्र फाउंडेशन चेन्नई के कलाकार भरतनाट्यम नृत्य शैली में हनुमान का पाताललोक में प्रवेश, हनुमान-मकरध्वज संवाद, अहिरावण वध, रावण का धर्म उपदेश, श्रीराम-रावण युद्ध, रावण वध एवं श्रीराम राज्याभिषेक की प्रस्तुति देंगे।
