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भोपाल, 11 अक्टूबर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल संभाग में अगले दो दिन बारिश और तेज आंधी चलने की संभावना है। प्रदेश के उत्तरी हिस्से में दो चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं, जिनके असर से रविवार और सोमवार को कई जिलों में मौसम बदला रहेगा। दूसरी ओर, इंदौर में रात का न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। 13 और 14 अक्टूबर को मौसम साफ रहने का अनुमान जताया है, जबकि 15 अक्टूबर के बाद बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव के क्षेत्र के असर से प्रदेश में फिर बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
मौसम विभाग के मुताबिक, रविवार और सोमवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया और श्योपुर में बारिश हो सकती है। प्रदेश के ऊपरी हिस्से में सक्रिय दो चक्रवाती परिसंचरण के कारण आंधी और बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। इससे पहले शनिवार को सिंगरौली, रीवा, मऊगंज और सीधी जिलों में हल्की बारिश हुई। इन इलाकों में बादल छाए रहे और कुछ स्थानों पर आंधी का असर भी देखने को मिला। आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से 15 अक्टूबर के बाद मध्य प्रदेश में बारिश का एक और दौर आ सकता है। इससे पहले 13 और 14 अक्टूबर को मौसम साफ रहने का अनुमान है।
प्रदेश में दिन और रात के तापमान में अंतर देखने को मिल रहा है। दिन में धूप निकलने से कई शहरों में गर्मी बनी हुई है, जबकि रात में ठंडक बढ़ने लगी है। बीती रात इंदौर में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा अमरकंटक में 16.6 डिग्री, भोपाल और पचमढ़ी में 16.8 डिग्री, शाजापुर में 17 डिग्री तथा कटनी जिले के करौंदी में 17.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया गया। वहीं, दिन के तापमान की बात करें तो बड़वानी, ग्वालियर, राजगढ़, खजुराहो, धार और उज्जैन में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में इसी तरह का मौसम बना रह सकता है। दिन में धूप और रात में ठंडक का असर जारी रहने की संभावना है।
मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को ही विदा हो चुका है। हालांकि, मानसून की वापसी के बाद भी अलग-अलग मौसमी सिस्टम सक्रिय होने के कारण प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश हो रही है। पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की मौसमी स्थितियां देखने को मिलती हैं। इस बार भी ऐसा ही मौसम बना हुआ है। अक्टूबर की शुरुआत में आसमान साफ होने के साथ धूप निकली, जबकि रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। इसी दौरान कई जिलों में बारिश भी हुई।
जून से सितंबर तक चले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच से करीब 1.5 इंच कम है। इस तरह प्रदेश में औसत से लगभग 4 प्रतिशत कम बारिश हुई। क्षेत्रवार आंकड़ों में अंतर देखने को मिला। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम पानी गिरा।
पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल मिलाकर सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। हालांकि, इस क्षेत्र के कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा औसत से नीचे रहा। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश हुई। पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी ज्यादा रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।
प्रदेश के 25 जिलों में मानसून के दौरान बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो गया। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।
इसके विपरीत, प्रदेश के 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।
