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हजारों करोड़ के निवेश प्रस्तावों के बाद अब वन्यजीव, एडवेंचर और एमआईसीई पर्यटन पर फोकस, स्थानीय समुदायों को पर्यटन की वैल्यू चेन से जोड़ने की तैयारी
भोपाल, 08 अक्टूबर । मध्य प्रदेश की पर्यटन अर्थव्यवस्था अब नए विस्तार की दहलीज पर है। प्राकृतिक सौंदर्य, बाघों और चीतों से समृद्ध वन्यजीव क्षेत्र, ऐतिहासिक धरोहरें, आध्यात्मिक केंद्र और विविध सांस्कृतिक विरासत के बाद प्रदेश अब पर्यटन की नई विधाओं को भी बड़े आर्थिक अवसर में बदलने की तैयारी कर रहा है।
दरअसल, ‘मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026’ के दूसरे दिन गुरुवार को वन्यजीव एवं सतत पर्यटन पर मंथन के साथ एडवेंचर टूरिज्म और एमआईसीई आधारित इवेंट इकोनॉमी पर राउंडटेबल चर्चाएं होंगी। इससे पहले पहले दिन देश-विदेश के निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकों में होटल, रिसॉर्ट, वन्यजीव पर्यटन, हेरिटेज, फिल्म और हॉस्पिटैलिटी परियोजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आ चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में हुए एमओयू और लेटर ऑफ अवॉर्ड के बाद अब ट्रैवल मार्ट का दूसरा दिन प्रदेश के पर्यटन विकास की अगली रणनीति तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के साथ जोर इस बात पर रहेगा कि पर्यटन से पैदा होने वाली आर्थिक गतिविधियों का लाभ स्थानीय गांवों, युवाओं, प्रकृति गाइडों, होमस्टे संचालकों, हस्तशिल्पकारों, परिवहन कारोबारियों और स्थानीय खाद्य व्यवसायों तक कैसे पहुंचे।
वन्यजीव पर्यटन बनेगा सामुदायिक विकास का माध्यम
राजाभोज हॉल में सुबह 10 से 11 बजे तक होने वाली पैनल चर्चा का विषय ‘मध्य प्रदेश में भारत के वन्यजीव : वन्यजीव, समुदाय और सतत पर्यटन के जीवंत परिदृश्य’ रखा गया है। इसमें मध्य प्रदेश के वन्यजीव पर्यटन को संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर चर्चा होगी। कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, पन्ना और माधव जैसे वन्यजीव क्षेत्रों को प्रदेश की पर्यटन पहचान का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। बाघ और तेंदुए से लेकर चीता, घड़ियाल, गिद्ध और विविध पक्षी प्रजातियों तक प्रदेश की जैव विविधता पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण है।
इसमें पर्यटन मंत्रालय, मध्य प्रदेश ईकोटूरिज्म विकास बोर्ड और मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी तथा देश-विदेश के विशेषज्ञ इस विषय पर विचार रखेंगे। पर्यटन मंत्रालय के सचिव भुवनेश कुमार मुख्य वक्तव्य देंगे। चर्चा का संचालन वैक्सपोल होटल्स एंड रिसॉर्ट्स की संस्थापक एवं निदेशक तथा एटीओएआई विमेन्स कलेक्टिव की चेयरपर्सन अकांक्षा गर्ग करेंगी।
गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का आर्थिक लाभ
पैनल चर्चा में स्थानीय रोजगार, प्रशिक्षित प्रकृति गाइड, होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प और परिवहन को पर्यटन की मुख्य वैल्यू चेन से जोड़ने पर जोर रहेगा। इससे वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास बसे गांवों के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। पर्यटन की बढ़ती मांग के साथ स्थानीय समुदायों को सिर्फ पर्यटकों तक पहुंचने वाले सहायक वर्ग के रूप में देखने के बजाय उन्हें पर्यटन अर्थव्यवस्था का सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में चर्चा होगी।
पर्यटकों की वहन क्षमता, जिम्मेदार पर्यटक प्रबंधन, पर्यावरण-अनुकूल आधारभूत संरचना और पर्यटन से होने वाले लाभ के न्यायसंगत वितरण जैसे विषय भी एजेंडे में हैं। ग्राम स्टे के संस्थापक एवं सीईओ पारिक्षित सिंह, सीजीएच अर्थ एक्सपीरियंस होटल्स के जनरल मैनेजर डेविड राजू, बियॉन्ड एशिया के निदेशक टोबी सिंक्लेयर और वन्यजीव फोटोग्राफर शिवांग मेहता सहित विशेषज्ञ इस चर्चा में भाग लेंगे।
नए वन्यजीव सर्किटों पर जोर
मध्य प्रदेश के स्थापित टाइगर रिजर्वों के साथ नए प्रकृति और वन्यजीव सर्किट विकसित करने की संभावना भी ट्रैवल मार्ट के विमर्श में महत्वपूर्ण है। उद्देश्य पर्यटकों के प्रवास की अवधि बढ़ाना और पर्यटन गतिविधियों को कुछ चुनिंदा स्थलों तक सीमित रखने के बजाय नए क्षेत्रों तक पहुंचाना है। इस मॉडल में वन्यजीव सफारी के साथ स्थानीय संस्कृति, खान-पान, ग्रामीण जीवन, हस्तशिल्प और प्राकृतिक अनुभवों को जोड़ा जा सकता है। इससे पर्यटक को अधिक व्यापक अनुभव मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी पर्यटन से सीधा लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी।
