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-प्रभा कुम्भकार को मिली एक आधुनिक पहचान
दुर्ग, 06 अक्टूबर 2026/ जिले की शांत गलियों में मिट्टी की सोंधी खुशबू केवल माटी के बर्तनों की नहीं, बल्कि संघर्ष और स्वावलंबन के नए ताने-बाने की कहानी बुनती है। इसी माटी को नया आकार देकर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाली प्रभा कुम्भकार, दुर्ग जिले की एक समर्पित कुम्हार हैं। वर्षों से अपने हुनर और चाक के पहिए के सहारे जीवन की गाड़ी चला रहीं प्रभा के पास प्रतिभा की तो कोई कमी नहीं थी, लेकिन सीमित संसाधनों और कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण उनकी आजीविका की गति धीमी पड़ गई थी। ऐसे कठिन समय में, जन-सेवा और समाज के अंतिम व्यक्ति तक संबल पहुँचाने के सरकार की ’सेवा संकल्प’ भाव ने उनके जीवन में एक नया उजाला बिखेरा। स्ट्रीट वेंडरों और पारंपरिक कारीगरों तक योजना की पहुँच आसान होने से प्रभा बहन जैसी कई महिलाओं को भी बिना किसी जटिल प्रक्रिया के आसान ऋण सुविधा प्राप्त हुई। इस योजना के तहत मिली वित्तीय सहायता से उन्होंने बेहतर गुणवत्ता की मिट्टी और आधुनिक चाक उपकरण खरीदे और त्योहारी सीजन से पहले बड़े पैमाने पर दीये, मटके और सजावटी उत्पाद तैयार करने का साहस भी जुटाया।
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना से मिले प्रोत्साहन और डिजिटल भुगतान के माध्यम से मिलने वाले कैशबैक के लाभ ने प्रभा कुम्भकार के पारंपरिक व्यवसाय को एक आधुनिक पहचान दी। आज उनकी मेहनत और प्रशासनिक सेवा संकल्प के इस अनोखे संगम से उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है एवं उनका परिवार भी एक सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जी रहा है।
