सीएम साय कर रहे SING फोरम 2026 में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व, सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के लीडरशिप डिनर में हुए शामिल
Spread the loveरायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व...
Spread the loveरायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व...
Spread the loveराजनांदगांव – छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले...
Spread the loveकॉर्पोरेट कार्यालय सहित देश भर के...
कारंजा , 05 अक्टूबर । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक बालासाहेब देवरस और ज्येष्ठ प्रचारक भाऊराव देवरस की पैतृक भूमि कारंजा में नेत्रालय खुलेगा। जिसका लाभ मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र दोनों राज्यों के दो प्रमुख जिलों के साथ कई अन्य आसपास के ग्रामों को मिलेगा। वहीं लोकार्पण संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत करेंगे।
इस संबंध में न्यास के सचिव सचिन अग्रवाल ने सोमवार को बताया कि बालासाहेब एवं भाऊराव देवरस सेवान्यास के तत्वावधान में गांव में नवनिर्मित स्मृति भवन तथा माधव नेत्रालय द्वारा संचालित बालासाहेब देवरस नेत्रालय का लोकार्पण मंगलवार, छह अक्टूबर को दोपहर 2.30 बजे प्रारंभ होगा। निमंत्रण का मूल भाव “राष्ट्र सेवा ही परम धर्म” है, जो देवरस बंधुओं के जीवन और कार्य का भी सार रहा है। उन्होंने बताया कि यहां पहले से सिलाई मशीनों द्वारा मातृशक्ति को ट्रेनिंग देने का कार्य चल रहा है। अब नेत्र सेवा और आरंभ हो जाएगी। जिसमें कि मप्र का बालाघाट एवं महाराष्ट्र के गोदिया जिले के लोगों को लाभ मिलेगा।
दो भवन, दो उद्देश्य: स्मृति और सेवा
इस अवसर पर सेवान्यास के अध्यक्ष डॉ पवन स्थापक, उपाध्यक्ष अरविंद मार्डीकर ने न्यासी मंडल की ओर से सभी से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा, कारंजा में बने दोनों भवन अलग-अलग उद्देश्यों को पूरा करेंगे। स्मृति भवन बालासाहेब और भाऊराव देवरस के जीवन, विचार और संघ कार्य के प्रति उनके समर्पण की स्मृतियों को सहेजने का केंद्र होगा। नई पीढ़ी के लिए यह प्रेरणा स्थल बनेगा, जहां आकर वे जान सकेंगे कि सादगी, त्याग और सेवा के मार्ग पर चलकर समाज के लिए कितना बड़ा योगदान दिया जा सकता है।
श्री मार्डीकर ने कहा, बालासाहेब देवरस नेत्रालय स्मृति को सेवा के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास है। यह नेत्रालय माधव नेत्रालय द्वारा संचालित होगा। क्षेत्र के ग्रामीण और वनांचल में रहने वाले लोगों को नेत्र उपचार के लिए अब तक बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। नेत्रालय शुरू होने से उन्हें अपने ही क्षेत्र में उपचार की सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे समय, खर्च और परेशानी में कमी आएगी।
साथ ही उनका कहना यह भी रहा यह आयोजन केवल एक भवन के उद्घाटन तक सीमित नहीं है। यह उन मूल्यों का स्मरण है, जिन्होंने संघ कार्य को सेवा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की दिशा दी।
देवरस बंधुओं की प्रेरक विरासत
उल्लेखनीय है कि बालासाहेब देवरस ने संघ के तृतीय सरसंघचालक के रूप में संगठन का मार्गदर्शन किया। उन्होंने सेवा कार्यों को संघ की गतिविधियों में विशेष महत्व दिलाया। उनके छोटे भाई भाऊराव देवरस ज्येष्ठ प्रचारक के रूप में जीवनपर्यंत संगठन कार्य में लगे रहे। दोनों भाइयों ने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर राष्ट्र और समाज को सर्वोपरि रखा। उनकी जन्मभूमि से जुड़ा यह नया सेवा प्रकल्प उसी भावना का विस्तार माना जा रहा है।
महाकोशल और विदर्भ से आएंगे अतिथि
कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में उत्साह है। आयोजकों ने बताया है कि महाकोशल और विदर्भ प्रांत से बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक शामिल होंगे। अतिथियों के आवास, भोजन और बैठक आदि की व्यवस्था सुचारू रूप से करने के लिए न्यास ने आगमन की पूर्व सूचना देने का अनुरोध किया है। वहीं, ग्रामीणों में भी अपनी माटी से जुड़े महापुरुषों की स्मृति में बने भवनों के लोकार्पण को लेकर गर्व और उत्साह का माहौल है। कई घरों में अतिथियों के स्वागत की तैयारियां चल रही हैं।
बालाघाट जिले के लिए यह आयोजन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एक ओर देश के बड़े सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन के सरसंघचालक का कारंजा आगमन होगा, दूसरी ओर क्षेत्र को स्वास्थ्य सेवा की नई सौगात मिलेगी। स्मृति भवन आने वाले वर्षों में प्रेरणा का केंद्र बनेगा और नेत्रालय जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की रोशनी। आयोजकों ने सभी स्वयंसेवकों, क्षेत्रवासियों और शुभचिंतकों से समय पर पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने का आग्रह किया है।
