देश में 22 लाख करोड़ रुपये के पेट्रोल-डीजल और गैस आयात को कम करना हमारा मिशनः नितिन गडकरी
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• एआई-संचालित ‘सेफ नेटवर्क’ समाधानों ने 4.4 बिलियन स्पैम मैसेज की पहचान की और 1.62 मिलियन से अधिक दुर्भावनापूर्ण लिंक ब्लॉक किए
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है, लेकिन इसके साथ ही साइबर धोखाधड़ी का दायरा और जटिलता भी लगातार बढ़ रही है। जो खतरा कभी मुख्य रूप से स्पैम कॉल्स और फ़िशिंग मैसेज तक सीमित था, वह अब धोखाधड़ी के एक इकोसिस्टम में बदल चुका है। इसमें दूसरे की पहचान चुराकर ठगी करने वाले स्कैम, फर्जी बैंकिंग अनुरोध, दुर्भावनापूर्ण लिंक, निवेश से जुड़े फ्रॉड और ओटीपी के जरिए होने वाली वित्तीय ठगी शामिल हैं।
सरकार और उद्योग के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि यह खतरा अब व्यापक होने के साथ-साथ तेजी से संगठित भी है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के अनुसार, पिछले छह वर्षों में भारतीयों को साइबर धोखाधड़ी के कारण ₹52,976 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि देश में कुल अपराध के स्तर में गिरावट आने के बावजूद साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जैसे-जैसे बैंकिंग, पेमेंट्स, हेल्थकेयर, कॉमर्स और सरकारी सेवाओं में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी में और गहराई से बढ़ रहा है, वैसे-वैसे टेलीकॉम नेटवर्कों से डिजिटल सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने की उम्मीद की जा रही है। उपयोगकर्ता अब नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर से केवल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की ही नहीं, बल्कि डिजिटल संचार से जुड़े जोखिमों की पहचान करने और उन्हें कम करने की भी अपेक्षा रखते हैं।
दो वर्ष पहले, एयरटेल ने इस बदलाव को समझा और ग्राहक सुरक्षा के क्षेत्र में फर्स्ट-मूवर अप्रोच अपनाया। सितंबर 2024 में, एयरटेल ने भारत का पहला नेटवर्क-आधारित, एआई-संचालित स्पैम डिटेक्शन सॉल्यूशन लॉन्च किया, जो नेटवर्क इंटेलिजेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक साथ लाकर ग्राहकों को स्पैम कॉल और एसएमएस से सुरक्षित रखता है।
तब से, एयरटेल ने पिछले 2 वर्षों में अपने एआई-संचालित सेफ नेटवर्क इनिशिएटिव का विस्तार किया है, जो नेटवर्क स्तर पर धोखाधड़ी की रोकथाम की दिशा में कंपनी के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। इसका उद्देश्य ऐसी सुरक्षा प्रणालियां तैयार करना है, जो बैकग्राउंड में काम करें और ग्राहकों को अतिरिक्त ऐप इंस्टॉल करने या खतरों की मैन्युअल रिपोर्टिंग करने की आवश्यकता न पड़े।
एयरटेल का सेफ नेटवर्क अब नेटवर्क-आधारित डिजिटल सुरक्षा टूल्स के एक व्यापक सेट के रूप में विकसित हो गया है। इसके प्रमुख घटकों में शामिल हैं:
एयरटेल की सुरक्षित नेटवर्क पहल दूरसंचार उद्योग में हो रहे व्यापक बदलाव को दर्शाती है, जहां नेटवर्क से अब केवल संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय भारत के तेजी से विस्तार करते डिजिटल तंत्र को सुरक्षित रखने में भी अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की उम्मीद की जा रही है।
