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दरभंगा, 21 सितंबर (हि.स.)। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में सोमवार को ‘प्रबुद्ध भारतम्’ स्मारिका के लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय सह-संयोजक चंद्रकांत ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमारी सांस्कृतिक पहचान का आधार है। नई पीढ़ी को इससे जोड़ना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय दृष्टि से ज्ञान, संस्कृति एवं राष्ट्रबोध को समझने पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कार्यकारी कुलपति प्रो. दिलीप झा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के निर्माण का ठोस आधार है। संस्कृत विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि भारतीय ज्ञान, दर्शन, साहित्य, संस्कृति एवं जीवन-मूल्यों से जुड़े विमर्श को अकादमिक जगत में व्यापक बनाएं। उन्होंने ‘प्रबुद्ध भारतम्’ के प्रकाशन को भारतीय चिंतन एवं सांस्कृतिक चेतना को अभिव्यक्त करने वाला सार्थक प्रयास बताया।
कुलसचिव डॉ. दिनेश झा ने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल शक्ति उसकी ज्ञान-संपदा, चिंतन परंपरा तथा विविधता में निहित एकात्म दृष्टि में है। उन्होंने युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा के समकालीन एवं जीवनोपयोगी पक्षों से परिचित कराने की आवश्यकता बताई।
स्वागत भाषण डॉ. लक्ष्मी ने दिया, जबकि संचालन डॉ. अनुराग मिश्रा ने किया। समारोह में विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, शोधार्थी, विद्यार्थी, कर्मी, मीडिया प्रतिनिधि तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अंत में पूर्व विधि पदाधिकारी डॉ. कृष्णानंद मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
