बोल नहीं सकती तो क्या हुआ, लिखकर भी रख सकती हैं अपना पक्ष; छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी
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बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट ने आज छत्तीसगढ़ के हजारों प्रतीक्षारत कांस्टेबल अभ्यर्थियों के हक में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका SLP खारिज कर दी है। यह मामला वर्ष 2017 में जारी 2259 कांस्टेबल पदों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें प्रतीक्षा सूची के प्रावधान को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।
पारस राम ध्रुव एवं अन्य के पक्ष में आए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के 1 फरवरी 2024 के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल की थी। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि पुलिस कांस्टेबल सेवा नियम 2007 के नियम 13(2) के तहत प्रोन्नति, सेवानिवृत्ति, कैडर परिवर्तन अथवा अन्य किसी कारण से रिक्त हुए पदों को भी वैध प्रतीक्षा सूची से भरा जाना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट पहले ही 17 नवंबर 2025 के आदेश में 47 सफल अभ्यर्थियों के पदों को सुरक्षित रखने का निर्देश जारी किया था। सोमवार की सुनवाई में प्रतिवादियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नौशीना अली, हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रुचि नागर, एओआर देवाशीष तिवारी के माध्यम से, और छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के नटराज उपस्थित हुए। इस निर्णय के बाद प्रदेश में लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे सैकड़ों अभ्यर्थियों की उम्मीदों को नया बल मिला है।
