विकसित छत्तीसगढ़ से साकार होगा विकसित भारत का संकल्प : केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया
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भागलपुर, 10 सितंबर । गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने अब विकराल रूप धारण कर लिया है। ग्रामीण और दियारा इलाकों को जलमग्न करने के बाद बाढ़ का पानी अब भागलपुर के शहरी क्षेत्रों में भी तेजी से फैलने लगा है। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 1, 9 और 10 के रिहायशी इलाकों में पानी घुसने से स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है।
हालात इतने बदतर हैं कि कई परिवार अपने घरों के निचले हिस्से डूबने के बाद छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं। शहरी इलाकों की गलियां तालाब में तब्दील हो चुकी हैं और लोगों का सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। खाने-पीने की वस्तुएं, दवाइयां और बच्चों के लिए दूध जैसी रोजमर्रा की जरूरतें जुटाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को इस आपदा में सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पानी के बीच से ही उतरकर लोगों को आने-जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इसके साथ ही, कई शहरी स्कूलों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है। शांति समिति के सदस्य एवं समाजसेवी संजय कुमार यादव ने बताया कि नगर निगम का वार्ड नंबर 19 भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है और वहां जलस्तर काफी ऊंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को पर्याप्त सुविधाएं और राहत सामग्री नहीं मिल पा रही है। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल राहत पहुंचाने के साथ-साथ इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। संजय कुमार ने कहा, “हर साल बाढ़ और कटाव से जनता त्रस्त होती है।
प्रशासन को सुखाड़ (गर्मी) के समय ही कटाव रोधी और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े स्थायी कार्य करने चाहिए, ताकि हर साल ऐसी भयावह स्थिति का सामना न करना पड़े। फिलहाल, गंगा के बढ़ते जलस्तर ने शहर के रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में लेकर प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। पीड़ित परिवारों को इस समय तत्काल भोजन, दवा और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने की सख्त जरूरत है।
