नायरा एम. बनर्जी ने स्टोरी टीवी के शो ‘प्रेमकथा’ पर की बात, SLB जैसी एनर्जी लाने की कोशिश पर जाहिर की खुशी
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जब बिग बॉस ने पहली बार भारतीय टेलीविजन पर दस्तक दी, तो इसका कॉन्सेप्ट बेहद आसान लेकिन दिलचस्प था—कुछ सेलिब्रिटीज़ को एक घर में बंद कर दीजिए, उन्हें बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग कर दीजिए और 24 घंटे कैमरों के सामने रखिए। लेकिन दो दशक बाद यही फॉर्मैट एक बड़े सांस्कृतिक फेनोमेना में बदल चुका है।
6 सितंबर को अपने 20वें सीज़न के साथ बिग बॉस ने एक ऐतिहासिक पड़ाव पूरा किया। इस बार भी सुपरस्टार सलमान खान शो की मेजबानी कर रहे हैं। उनका खास अंदाज, हाजिरजवाबी और दमदार मौजूदगी लंबे समय से बिग बॉस की पहचान का हिस्सा रहे हैं। टेलीविजन पर कई ट्रेंड आए और चले गए, लेकिन बिग बॉस ने अपनी लोकप्रियता बनाए रखी। शो ने डिजिटल और स्ट्रीमिंग के दौर में भी खुद को बदला और दर्शकों के बीच अपनी पकड़ बरकरार रखी।
इस क्रेज़ को समझने के लिए किसी बड़े शहर में बिग बॉस के सीज़न के दौरान बस थोड़ा आसपास देखना काफी है। मुंबई या दिल्ली की लोकल ट्रेन या मेट्रो में शाम के समय सफर करते हुए नज़र घुमाइए। कई मोबाइल स्क्रीन पर बिग बॉस के लेटेस्ट एपिसोड के रीकैप, वायरल क्लिप्स या घर में हुई किसी बहस की झलक आसानी से दिख जाएगी।
घरों में, ऑफिस के लंच ब्रेक में और दोस्तों की वीकेंड मीटिंग्स में बातचीत अक्सर इसी पर पहुंच जाती है—किसने सही के लिए आवाज़ उठाई, किसने किसका गेम समझा, किसने माइंड गेम खेला और इस वीकेंड कौन घर से बाहर हो सकता है।
जो कभी सिर्फ टाइमपास या गिल्टी प्लेज़र के तौर पर देखा जाता था, वह आज एक बड़े कल्ट फॉलोइंग में बदल चुका है। बिग बॉस इंसानी सोच, रिश्तों, टकराव और रणनीति को करीब से दिखाता है। यही वजह है कि दर्शक सिर्फ शो देखते नहीं, बल्कि उसके बारे में अपनी राय बनाते हैं और खुलकर चर्चा करते हैं।
फैंस सिर्फ अपने पसंदीदा कंटेस्टेंट्स को देखते नहीं हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर उनका समर्थन करते हैं, उनके गेम और रणनीति पर बहस करते हैं और उन्हें वोट भी करते हैं। शो का यह रोज़ाना देखने वाला अनुभव अलग-अलग पीढ़ियों को जोड़ता है—कॉलेज जाने वाले छात्रों से लेकर रोज़ सफर करने वाले युवाओं तक और डिनर टेबल के आसपास साथ बैठकर शो देखने वाले परिवारों तक।
लगातार बदलते मीडिया और मनोरंजन के दौर में 20 साल पूरे करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। बिग बॉस अब सिर्फ टीआरपी की दौड़ में शामिल एक और रियलिटी शो नहीं है। यह भारतीय पॉप कल्चर का ऐसा हिस्सा बन चुका है, जिसने अपनी एक स्थायी जगह बना ली है।
सीज़न 20 की शुरुआत के साथ बिग बॉस एक बार फिर साबित कर रहा है कि पिछले दो दशकों में कंटेंट और देखने के तरीकों में कितना भी बदलाव क्यों न आया हो, इस शो को लेकर भारत की दीवानगी आज भी वैसी ही है।
सीधी सी बात है—भारत आज भी बिग बॉस से नज़रें नहीं हटा पाता।
