CG- हसदेव नदी में आरक्षक ने लगाई छलांग! पुल पर बाइक, मोबाइल और ID कार्ड मिलने से मचा हड़कंप
Spread the loveकोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में...
Spread the loveकोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में...
Spread the loveभिलाई : छत्तीसगढ़ के भिलाई में...
Spread the love00 31 दिसंबर तक पात्र लोगों...
राज्यपाल ने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में कन्या छात्रावास, मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र का किया शुभारंभ
रायपुर, 07 सितम्बर 2026/ राज्यपाल रमेन डेका ने आज कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में सावित्रीबाई फुले कन्या छात्रावास का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र का उद्घाटन भी किया। विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज का दिन विश्वविद्यालय के लिए विशेष महत्व रखता है। सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा के प्रसार और नारी सशक्तिकरण के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनके नाम पर कन्या छात्रावास का नामकरण छात्राओं को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह छात्रावास दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनकी उच्च शिक्षा और प्रतिभा विकास में सहायक होगा।
राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आगमन से मीडिया और पत्रकारिता के स्वरूप में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। ऐसे समय में विश्वविद्यालय में स्थापित मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र विद्यार्थियों को नई तकनीकों को समझने तथा उनके जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्यपाल डेका ने विश्वविद्यालय के प्रेरणा स्त्रोत स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे जी की प्रतिमा में श्रद्धा-सुमन अर्पित किये। उन्होंने स्व. ठाकरे जी के सानिध्य में बिताए गए अवसरों और प्रेरणादायी उद्धरणों को साझा किया।
डेका ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है और इसकी विश्वसनीयता बनाए रखना प्रत्येक पत्रकार का दायित्व है। समाचारों में तथ्य, सत्य और जनहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किसी भी व्यक्ति के संबंध में समाचार प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पूर्ण पुष्टि आवश्यक है, क्योंकि एक समाचार का प्रभाव व्यक्ति और समाज दोनों पर पड़ सकता है।
डेका ने कहा कि सोशल मीडिया के वर्तमान दौर में सूचनाओं का तेजी से प्रसार हो रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर उपलब्ध प्रत्येक सामग्री सत्य हो, यह आवश्यक नहीं है। ऐसे में पत्रकारों को तथ्यों की जांच-पड़ताल के बाद ही समाचारों को प्रसारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। एक श्रेष्ठ पत्रकार वह नहीं जो सबसे पहले खबर दे, बल्कि वह है जो सही, तथ्यपरक और जिम्मेदारी के साथ खबर दे।
राज्यपाल ने प्रिंट मीडिया के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, एआई और सोशल मीडिया के आधुनिक दौर में भी प्रिंट मीडिया आज भी विश्वसनीय माध्यम समाज में बना हुआ है। पत्रकारिता को समाज के अंतिम व्यक्ति की आवश्यकताओं और समस्याओं को सामने लाने तथा व्यवस्था में आवश्यक सुधार के लिए अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में अनेक ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए हैं, लेकिन वे व्यापक रूप से पहचाने नहीं जा सके। ऐसे अनसुने नायक-नायिकाओं के कार्यों को समाचारों और लेखों के माध्यम से समाज के सामने लाने से अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के कल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करने तथा कम से कम एक हजार विद्यार्थियों का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों की आवश्यक मान्यता सुनिश्चित करने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति श्री मनोज दयाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशुतोष मंडावी विभागाध्यक्ष प्रबंधन और आभार प्रदर्शन सुनील कुमार शर्मा कुलसचिव ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षक, प्राध्यापकगण, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
