आज का राशिफल: चंद्रमा का मिथुन में गोचर, जानिए किन राशियों को मिलेगा लाभ और किसे बरतनी होगी सावधानी
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Spread the loveइंदौर से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने दो दिन किया प्रतिमा...
इंदौर से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने दो दिन किया प्रतिमा विस्थापन का प्रयास, क्रेन और तकनीकी संसाधन भी नहीं आए काम
हनुमान मंदिर का ढांचा तोड़ा; खंडित होने के डर से स्कैनिंग के बाद शिफ्टिंग होगी,
उज्जैन। सतीगेट-छत्रीचौक मार्ग के चौड़ीकरण और विकास कार्य के लिए शुक्रवार को खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को सुरक्षित रूप से विस्थापित करने की कोशिश की गई, लेकिन तमाम तकनीकी तैयारियों और विशेषज्ञों की मौजूदगी के बावजूद यह प्रयास सफल नहीं हो सका। इंदौर से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने स्थानीय प्रशासनिक अमले के साथ मिलकर प्रतिमा को निर्धारित स्थान से हटाने के लिए पूरी कवायद की। फूलों से सजे आईसर वाहन, क्रेन सहित अन्य संसाधन मौके पर जुटाए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिली।
शुक्रवार को शुरू हुई प्रक्रिया शनिवार को भी जारी रही। विशेषज्ञों ने प्रतिमा को किसी प्रकार की क्षति पहुंचाए बिना स्थानांतरित करने के लिए तकनीकी तरीके से प्रयास किया। काफी देर तक अलग-अलग स्तर पर प्रयास किए गए, लेकिन बाबा खड़े हनुमान अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए। अंततः टीम को फिलहाल कार्रवाई रोकनी पड़ी।
दो दिन की कवायद के बाद भी नहीं मिली सफलता
प्रतिमा के विस्थापन के लिए विशेषज्ञों ने पूरी तकनीकी तैयारी के साथ काम शुरू किया था। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्रेन और अन्य संसाधनों की व्यवस्था की गई थी। प्रशासन और नगर निगम की मौजूदगी में प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, लेकिन प्रतिमा को हिलाने में सफलता नहीं मिली।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे प्रशासन किस तकनीकी प्रक्रिया को अपनाता है। क्या विशेषज्ञ टीम किसी नए तरीके से प्रतिमा को स्थानांतरित करने का प्रयास करेगी या विकास कार्य की योजना में बदलाव किया जाएगा, इसे लेकर लोगों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है।
आस्था के आगे तकनीक भी बेअसर!
खड़े हनुमान मंदिर से जुड़ी लोगों की आस्था को देखते हुए प्रतिमा विस्थापन की कार्रवाई शुरू होते ही शहर में इसकी चर्चा तेज हो गई। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच यह बात भी कही जा रही है कि जब अत्याधुनिक संसाधनों और विशेषज्ञों की पूरी टीम के प्रयास के बावजूद बाबा अपनी जगह से नहीं हिले तो इसे लोग अपनी-अपनी आस्था के नजरिए से देख रहे हैं।
भक्तों के बीच तो यहां तक चर्चा है कि बाबा खड़े हनुमान को भी बाबा महाकाल की सवारी का स्वागत करना है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम और भगवान महादेव के बीच गहरा आध्यात्मिक संबंध माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालु इस घटनाक्रम को भी बाबा की इच्छा से जोड़कर देख रहे हैं।
पीढ़ियों से आस्था का केंद्र हैं खड़े हनुमान
उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था वर्षों पुरानी है। पीढ़ियां बदलती रहीं, लेकिन बाबा खड़े हनुमान के प्रति लोगों की श्रद्धा और विश्वास कायम रहा। शहर ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर से जुड़ी पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के चलते श्रद्धालु यहां ताबीज, झाड़नी और अन्य धार्मिक क्रियाओं के लिए भी आते रहे हैं। लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर बाबा के दरबार में पहुंचते हैं और आस्था के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।
विकास जरूरी, लेकिन आस्था का सम्मान भी जरूरी
सतीगेट-छत्रीचौक मार्ग का चौड़ीकरण शहर के यातायात और विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि विकास कार्य के लिए मंदिर और प्रतिमा को स्थानांतरित किए जाने की कार्रवाई ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी प्रभावित किया है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि शहर का विकास आवश्यक है, लेकिन धार्मिक स्थलों और उनसे जुड़ी आस्था को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए। प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया में जल्दबाजी के बजाय उसकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि किसी भी प्रकार की क्षति होने पर श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
अब प्रशासन के अगले कदम पर नजर
दो दिन तक किए गए प्रयासों के बाद भी जब खड़े हनुमान की प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली तो अब प्रशासन के सामने आगे की रणनीति तय करने की चुनौती है। विशेषज्ञ टीम किस नई तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से प्रतिमा को सुरक्षित रूप से विस्थापित करने का प्रयास करेगी या विकास कार्य को लेकर कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाएगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
फिलहाल सतीगेट-छत्रीचौक मार्ग पर हुई यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। तकनीक पूरी तैयारी के साथ पहुंची, क्रेन और तमाम इंतजाम भी किए गए, लेकिन खड़े हनुमान अपनी जगह से नहीं हिले—अब आगे क्या होगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
