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उज्जैन, 28 अगस्त । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन पर्व पर देश की सबसे पहली राखी भगवान महाकाल को अर्पित की गई। शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे आयोजित भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को दो फीट लंबी विशेष राखी बांधी और सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया।
धार्मिक नगरी उज्जैन में रक्षाबंधन के पावन पर्व का शुभारंभ सबसे पहले बाबा महाकाल के दरबार से हुआ। शुक्रवार तड़के भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने भगवान महाकाल को रक्षासूत्र बांधकर देश और समाज की खुशहाली की कामना की। मान्यता के अनुसार, सनातन परंपरा के सभी प्रमुख पर्वों की शुरुआत सबसे पहले राजाधिराज महाकाल के आंगन से ही होती है।
राखी बांधने की इस पावन परंपरा के लिए पुजारी ओम गुरु और राजेश शर्मा के परिवार की महिलाएं रात करीब दो बजे ही मंदिर परिसर पहुंच गईं । भस्म आरती में बाबा महाकाल को भस्म अर्पित किए जाने के बाद मंत्रोच्चार के बीच दो फीट लंबी भव्य राखी भगवान के स्वरूप पर समर्पित की गई। पूरे सावन माह व्रत-उपवास रखने वाली महिलाओं ने इस प्रसाद को ग्रहण कर अपना व्रत खोला और इसके बाद अपने भाइयों को राखी बांधी।
रक्षाबंधन और श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर बाबा महाकाल को सवा लाख शुद्ध देसी घी के लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। धार्मिक मान्यता है कि पूरे सावन माह उपवास रखने वाले श्रद्धालु पूर्णिमा पर महाकाल के लड्डू प्रसाद को ग्रहण कर ही अपना व्रत पूर्ण करते हैं। भक्तों में वितरण के लिए मंदिर समिति और पुजारियों द्वारा बड़े पैमाने पर यह प्रसाद तैयार कराया गया था।
पुजारी आकाश गुरु के अनुसार, लगभग दो फीट की यह विशेष राखी पुजारी परिवार की महिलाओं द्वारा करीब एक सप्ताह की कठिन मेहनत से तैयार की गई । निर्माण के दौरान महिलाएं लगातार ‘जय महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करती रहीं। राखी को रेशमी वस्त्र, रेशमी धागों, कांच वर्क और आभूषणों से सजाया गया। इसमें भगवान महाकाल के प्रिय त्रिनेत्र, ‘ॐ’, त्रिपुंड और रुद्राक्ष को शामिल किया गया। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता के प्रतीक चिह्नों को भी इसमें स्थान दिया गया।
