बलरामपुर में हुए हादसे का मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, मृतकाें के परिजनाें को दो लाख तथा घायलों को 50 हजार सहायता राशि की घोषणा
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विमानन के इतिहास में 27 अगस्त की तारीख इसी बदलाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में दर्ज है। साल 1939 के इस तारीख पर जर्मनी में जेट इंजन से संचालित दुनिया के पहले विमान हेनकेल ही-178 ने अपनी पहली सफल उड़ान भरी थी। इस ऐतिहासिक उड़ान ने आधुनिक जेट विमानन के विकास की दिशा में एक नया अध्याय खोल दिया।
जर्मन विमान निर्माता और इंजीनियर एर्न्स्ट हाइन्केल के नेतृत्व में तैयार किया गया यह विमान उस दौर की तकनीक से काफी अलग था। ही-178 में टर्बोजेट इंजन का इस्तेमाल किया गया था, जिसने भविष्य के तेज रफ्तार यात्री और सैन्य विमानों की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हालांकि, इस विमान को जर्मन वायुसेना में शामिल नहीं किया गया और तत्कालीन सैन्य अधिकारियों ने इसके विकास को अपेक्षित समर्थन नहीं दिया। बावजूद इसके, जेट तकनीक पर शोध और प्रयोग जारी रहे। बाद के वर्षों में इसी तकनीक ने विमानन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाए और आज दुनिया के अधिकांश आधुनिक यात्री विमान जेट इंजनों की शक्ति से आसमान में उड़ान भरते हैं।
