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नई दिल्ली, 21 अगस्त । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सुबह हमेशा की तरह सुभाषितम् के रूप में परोपकार की भावना से ओतप्रोत श्लोक अपने एक्स हैंडल परप्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया सुभाषितम्, नदियों से परोपकार की भावना को सीखने का दिया संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा,” नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।
यह सुभाषितम् है, ”जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः। इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥” इसमें प्रकृति के माध्यम से मनुष्य को परोपकार की सीख दी गई है। कवि कहता है, ”संसार की सभी नदियां पहाड़ों से निकलकर बिना थके निरंतर समुद्र की ओर बहती रहती हैं। नदियां अपना जल स्वयं नहीं पीतीं, बल्कि मार्ग में आने वाले सभी जीवों की प्यास बुझाती हैं और खेतों को सींचती हैं।”
कवि की कल्पना है कि नदियां इस निस्वार्थ यात्रा के माध्यम से मानव जाति को मूक संदेश दे रही हैं। वे मनुष्यों से कह रही हैं, “जिस प्रकार हम अपना सर्वस्व दूसरों के लिए समर्पित करते हुए अंत में समुद्र में विलीन हो जाती हैं, उसी प्रकार तुम मनुष्यों को भी अपने जीवन का उपयोग केवल स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि दूसरों की भलाई और सेवा के लिए करना चाहिए।”
