Sat. Oct 23rd, 2021

    त्रिमुर्ति कालीका माता मंदिर गरबा महोत्सव का आठवां दिन

    थांदला से (विवेक व्यास, माधव एक्सप्रेस)थांदला नगर में स्थित त्रिमुर्ति कालिकामाता मंदिर समिति द्वारा गरबे महोत्सव का कल आठवा दिन आपार भीड़ व गरबा अपने चरम पे वही भाजपा नगर परिषद अध्यक्ष बंटी डामोर ओर भाजपा मण्डल महामंत्री सुनील पड़दा द्वारा कालकामाता मंदिर पर आरती उतारकर व गरबे खेलकर कालिका माता की आराधना की नवरात्रि के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके हैं और कल मां दुर्गा के आठवें स्वरूप आदिशक्ति महागौरी की पूजा की गई। इस दिन के देवी के पूजा मूल भाव को दर्शाता है। देवी भागवत पुराण में बताया गया है कि मां के 9 रूपों और 10 महाविद्या सभी आदिशक्ति के अंश और स्वरूप हैं। लेकिन महादेव के साथ उनकी अर्धांगिनी के रूप में महागौरी हमेशा विराजमान रहती हैं। मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से सोमचक्र जाग्रत होता है और इनकी कृपा से हर असंभव कार्य पूर्ण हो जाते हैं। ज्यादातर घरों में इस दिन कन्या पूजन किया जाता है और कुछ लोग नवमी के दिन पूजा-अर्चना करने के बाद कन्या पूजन करते हैं। महागौरी ने अपनी तपस्या से इन्होंने गौर वर्ण प्राप्त किया था। उत्पत्ति के समय यह आठ वर्ष की थीं। इसलिए इन्हें नवरात्र के आठवें दिन पूजा जाता है। अपने भक्तों के लिए यह अन्नपूर्णा स्वरूप हैं। यह धन-वैभव और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं। इस दिन दुर्गा सप्तशती के मध्यम चरित्र का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। जो लोग नवरात्रि के नौ दिन व्रत नहीं रख पाते हैं, वह केवल पड़वा और अष्टमी के दिन व्रत रखते हैं और नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं। पहले और आठवें दिन का व्रत करने से भी पूरे नौ दिन के व्रत का फल मिलता है।
    इस तरह कहलाईं माता महागौरी
    देवी भागवत पुराण के अनुसार, राजा हिमालय के घर देवी पार्वती का जन्म हुआ था। उनको आठ वर्ष की आयु में ही अपने पूर्व जन्म की घटनाओं का आभास होने लग गया था। तब से ही उन्होंने भगवान शिव को अपना पति मान लिया था और उनको प्राप्त करने के लिए तपस्या शुरू कर दी थी। तपस्या के दौरान एक वक्त ऐसा आया कि मां केवल कंद मूल फल और पत्तों का आहार करने लगीं। बाद में मां ने केवल वायु पीकर ही तप करना आरंभ कर दिया। मां की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनको गंगा स्नान करने को कहा। जैसे ही माता पार्वती गंगा स्नान करने गईं तब देवी का एक स्वरूप श्याम वर्ण के साथ प्रकट हुआ, जो कौशिकी देवी कहलाईं। दूसरा स्वरूप चंद्रमा के समान प्रकट हुआ, जो महागौरी कहलाईं। मां महागौरी अपने हर भक्त की मुराद पूरी करती हैं और सभी समस्याओं से मुक्ति दिलाती है समिति के सभी सदस्य गरबा महोत्सव में सम्मिलत हुवे वही पुलिस प्रशासन व थाना प्रभारी कौशल्या चौहान द्वारा नगर में प्रमुख चौरा पर भृमण किया गया। नवरात्रि की शुभकामनाए

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