Fri. Sep 24th, 2021

    नगर में धूमधाम से गणेश प्रतिमाओं का चलसमरोह निकालकर मूर्ति की स्थापना कर उत्सव मनाया गया

    थांदला से (विवेक व्यास, माधव एक्सप्रेस) – कल दिनांक 10/9/2021 को दिनभर थांदला नगर में गणेशउत्सव त्योहार में मजा और उल्लास, उत्साह के साथ 10 दिवसीय लंबे उत्सव को मनाया जाता है नाम से पता चलता है, कि इस शुभ अवसर पर लोग विघ्नहर्ता, भगवान गणेश की पूजा अर्चना करते हैं. कैलाश पर्वत से उनकी माता पार्वती के साथ उनके आगमन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है.
    स्कंद पुराण, नारद पुराण और ब्रह्म वैवर्त पुराण में भी भगवान गणेश की महिमा की गई है. उन्हें ज्ञान और बाधा निवारण के देवता के रूप में पूजा जाता है, इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता के रूप में जाना जाता है, जहां ‘विघ्न’ का अर्थ है बाधाएं और ‘हर्ता’ का अर्थ है जो उन्हें दूर करता है. कोई नया काम या शादी जैसे कुछ नया शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है जब भी हम कोई शुभ कार्य आरंभ करते हैं, तो कहा जाता है कि कार्य का श्री गणेश हो गया। इसी से भगवान श्री गणेश की महत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है। जीवन के हर क्षेत्र में गणपति विराजमान हैं। पूजा-पाठ, विधि-विधान, हर मांगलिक-वैदिक कार्यों को प्रारंभ करते समय सर्वप्रथम गणपति का ‘सुमरन’ करते हैं।
    हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश का अद्वितीय महत्व है। यह बुद्धि के अधिदेवता विघ्ननाशक है। ‘गणेश’ शब्द का अर्थ है- गणों का स्वामी। हमारे शरीर में पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ तथा चार अंतःकरण हैं तथा इनके पीछे जो शक्तियाँ हैं, उन्हीं को चौदह देवता कहते हैं।बप्पा की स्थापना के बाद विधि-विधान से उनकी पूजा और उपासना की जाती है. भक्तों के इस अराधना से प्रसन्न होकर भगवान उन्हें सुख-समृद्धि और सौभग्य प्रदान करते हैं. आज से नगर में पूरे 10 दिन तक चलने वाले इस गणेश महोत्सव में गणपति को 10 दिन के लिए घर में स्थापित किया गया है.प्रातः से ही नगर में बैंड बाजो, ढोल के साथ हर वार्ड में गणेशजी की प्रतिमा विधिविधान से स्थापना कर मांगलिक भजनों से नगर धर्ममय हो गया है थांदला नगर के प्रमुख चौराहों पिपली चौराहा आजाद मित्र मंडल , सांवरिया मंदिर, ओ एम जी ग्रुप गवली मोहल्ला , गांधी चौक , राजापुरा बस स्टैंड , नगर के हर परिवार में गणेश जी की स्थापना की वही थांदला भाजपा मंडल अध्यक्ष समर्थ उपाध्याय द्वारा भी आरती कर धर्म लाभ लिया पिछले कई वर्षों नगरीय व आदिवासी बाहुल्य जिले के ग्रामीण क्षेत्रो में भी इस पर्व को उत्साह से मनाया जाता है।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *