Thu. Dec 9th, 2021

       भारत स्थित एक नहीं, एक दर्जन नहीं, एक सैकड़ा नहीं अनगिनत संख्या में शुमार किला जिन्हें दुर्ग अथवा गढ़ भी कहा जाता है राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। यह एक ऐसा माध्यम हैं जिन्हें देखकर, जिनके बारे में पढ़कर जानकारियां प्राप्त कर प्राचीन काल, मध्यकालीन भारत की एक क्षेत्र में ही नहीं अनेक क्षेत्रों में जानकारियां प्राप्त होती हैं। अतीत का आईना दिखाते शोध खोज, चिंतन मनन के लिए विषय प्रस्तुत करते यह किला यही नहीं रुकते हैं बल्कि विभिन्न प्रकार के तथ्य निर्धारित करने में सहायक भूमिका का निर्वहन उपरांत उनका समाधान भी करते हैं।

    भारत के विभिन्न भागों में स्थित दुर्ग किला, समाज की वस्तु स्थिति, धार्मिक भावनाएं, आर्थिक स्थिति, तत्कालीन राजनीतिक उथल-पुथल जैसी एक नहीं अनेक जिज्ञासाएं उत्पन्न करते हुए तुलनात्मक अध्ययन हेतु विषय प्रस्तुत कर सबक ग्रहण करने का माध्यम भी बनते हैं। दुर्ग एक ओर जहां जय पराजय और शौर्य गाथा बयान करते हैं वहीं दूसरी ओर देश भक्ति, देश प्रेम का जज्बा पैदा करने का सबब भी बनते हैं। इस प्रकार सब मिलाजुला कर यह कह देना अधिक उपयुक्त होगा कि भारतीय दुर्ग भारतीय अतीत का बहुमूल्य खजाना है। इसलिए ही यह कहा जाता है कि भारत जैसे विशाल देश का सांस्कृतिक वैभव विभिन्न किला रूपी पत्थरों खंडहरों में विद्यमान है।

     यह किला खंडहर ही मानवता एवं मानव सभ्यता के प्रतीक है। यह वही खंडहर है जो भारतीय मानव, जीवन सभ्यता, संस्कृति अतीत इतिहास के गौरव को रेखांकित करने वाले तत्वों को भी अपने दामन में समाहित किए हुए हैं। अतएव किला खंडहरों में विद्यमान हमारे गौरवमयी भारतीय सांस्कृतिक वैभव को कभी भी किसी भी स्तर पर धन दौलत की तराजू में नहीं तौला जा सकता है। हां इन्हें संरक्षित कर आगामी पीढ़ी को अतीत के आईने से साक्षात्कार कराते हुए सत्यम शिवम सुंदरम के दर्शन उनसे मूक वाणी में संवाद स्थापित कर इतिहास की उत्तम जानकारी मुहैया कराई जा सकती है। अतः इन्हें बचाए रखना इनका संरक्षण किया जाना सार्वजनिक राष्ट्रीय हित में अनिवार्य है।

    भारतीय दुर्गों की बात की जाती है तो सहज भले में दिल्ली का लाल किला, आगरा का किला, ग्वालियर का किला, झांसी का किला, चंदेरी का किला, रायसेन का किला, देश के विभिन्न भागों में स्थित नामचीन किला आंखों के रूपहर्ले पर्दे पर चलचित्र की भांति दिखाई देने लगते हैं और यह भी एक बहुत बड़ी सच्चाई है कि उक्त किलों के बारे में बहुत कुछ जानकारियां भारतीय ही नहीं अपितु विदेशी नागरिक भी रखते हैं। 

     कारण साफ है कि भारत के प्रमुख किलों के बारे में समय-समय पर जानकारियां सार्वजनिक होती रहती हैं, शोध खोज होते रहते हैं, नई-नई जानकारियां निकल कर सामने आती रहती हैं। लेकिन इसके ठीक  विपरीत क्षेत्रीय स्तर पर आज भी एक नहीं अनेक ऐसे किला मौजूद हैं जो विभिन्न जानकारियों को अपने दामन में सुरक्षित रखे हुए पहचान एवं जीर्णोद्वार को तरस रहे हैं। आश्चर्य तब और अधिक बढ़ जाता है जब उससे संबंधित शासकीय संस्थाओं, स्थानीय शासकीय संस्थाओं की पूर्व जानकारी में होते हुए भी उपेक्षा का शिकार होकर अपनी बेबसी दुर्दशा के आंसू बहाते हुए पुरातत्व विरासत एवं पर्यटन प्रेमियों से इस दिशा में कुछ करने की अपेक्षा  रखते हैं।

    भारत के प्रमुख किलो में शुमार एक हजार साल से निरंतर अपनी उपस्थिति दर्ज कराता हुआ चंदेरी किला की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कायम है। वहीं मध्यकालीन चंदेरी राज्य के अंतर्गत संचालित मल्हारगढ़ किला आज अपनी पहचान ही नहीं संरक्षण संवर्धन को तरस रहा है। 16-17वीं सदी में निर्मित होने का खुला संकेत देता यह किला लगभग तीन हेक्टर से भी अधिक भूभाग में अवस्थित होकर अपने ऐतिहासिक एवं सामरिक महत्व का बोध अपनी पक्की सुरक्षा दीवार, दरवाजा, बुर्ज, किला परिसर में रखी हुई तोपों के माध्यम से आज भी भूल चूक से पहुंचते सैलानियों को करा रहा है। खंडहर बता रहे हैं कि इमारत बुलंद थी। कभी चंदेरी राज्य तो कभी खींची, होलकर सहित अन्य राजवंश की प्रशासनिक एवं सैन्य गतिविधियों का केंद्र रहा मल्हारगढ़ किला आज भी अपने समग्र विकास, सामयिक पहलुओं, उनकेे तात्कालीन महत्व का बयान मजबूती के साथ मूक भाषा में करता हुआ समझ आता है।

    किला परिसर में स्थित सर्व धर्म समभाव रूपी धार्मिक स्थल, सुंदर बावड़ी, बड़ा रूप धारण किए हुए अपने को बहुत हद तक सुरक्षित रखे हुए बावड़ी के किनारे निर्मित की गई विभिन्न प्रकार की संरचनाएं शोध खोज हेतु विषय प्रस्तुत करती नजर आती हैं। मध्य प्रदेश जिला अशोकनगर तहसील मुंगावली मुख्यालय से 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम मल्हारगढ़ में सदियों पूर्व से उपस्थित किला एक नहीं अनेक प्रकार की आपदाओं आसमानी सुल्तानी मार से अपने को बचते-बचाते हुए आज भी अपने अतीत की दास्तां बयान करते हुए मूक भाषा में संरक्षण उपरांत जीर्णोद्धार की गुहार कर रहा है।

     भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा संचालित विभिन्न ग्रामीण पर्यटन योजनाओं के सफल संचालन की असीम संभावनाएं दर्शाता ग्राम मल्हारगढ़ एवं किला के ऐतिहासिक, पुरातत्व महत्व को दृष्टिगत रखते हुए संस्कृति मंत्रालय एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भारत सरकार)  द्वारा राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित करने तदोपरांत जीर्णोद्वार की दिशा में कार्यवाही अपेक्षित ही नहीं अपितु अनिवार्य है। ताकि आगामी पीढ़ी अपने गौरवमय अतीत से रूबरू होकर एवं जानकारियां प्राप्त कर सकें।

   स्मरण रहे चंदेरी किला का सफल संरक्षण, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भारत सरकार) द्वारा किया जा रहा है। मल्हारगढ़ किला को संरक्षित किए जाने से एक ओर जहां हमारी अमूल्य धरोहर सुरक्षित हो सकेगी वहीं दूसरी ओर देश विदेश से चंदेरी किला सहित चन्देरी स्थित अन्य विरासत देखने आ रहे सैलानी मल्हारगढ़ किला से भी रूबरू हो सकेंगे। इस कारण क्षेत्र सहित चंदेरी पर्यटन एवं ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, पर्यटन क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे, सबसे बड़ी उपलब्धि यह होगी कि जिला अशोकनगर तहसील मुंगावली अंतर्गत एक नवीन ग्रामीण पर्यटन स्थल का उदय  होगा, जिसके दूरगामी सुखद परिणाम ग्राम के विकास में परिलक्षित होंगे। 

  अभी तक जिला अशोकनगर में मात्र एक चंदेरी किला को जाना पहचाना जाता है उसका खूब प्रचार-प्रसार भी है किन्तु दु:ख होता है कि जिला अशोकनगर अंतर्गत एक और प्राचीन किला मौजूद होते हुए भी आज अपनी पहचान, संरक्षण, संवर्धन को तरस रहा है। देर आए दुरूस्त आए कहावत में विश्वास व्यक्त करते हुए मल्हारगढ़ किला आज आशा भरी नजरों से संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार) एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भारत सरकार) से न्याय की गुहार लगा रहा है। 

फायदा

      यह होगा कि भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय द्वारा विधिवत राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित उपरांत मल्हारगढ़ किला का प्रचार-प्रसार होगा, किला परिसर में पर्यटक बुनियादी सुविधाएं विकसित होगी, मल्हारगढ़ किला का नाम प्रमुखता से भारत स्थित राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों में शुमार होगा कुल मिलाकर मल्हारगढ़ क़िला के साथ-साथ चंदेरी पर्यटन को बढ़ावा मिलने की पूर्ण संभावनाएं नजर आ रही है। 

सादर विन्रम मांग

   मल्हारगढ़ किला के प्राचीन एवं ऐतिहासिक महत्त्व को दृष्टिगत रखते हुए इस संबंध में आदरणीय श्री प्रहलाद पटेल संस्कृति एवं पर्यटन  राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भारत सरकार नई दिल्ली, क्षेत्रीय सांसद आदरणीय श्री के.पी. सिंह , राज्य सभा सांसद आदरणीय श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, श्रीमान महानिदेशक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भारत सरकार) नई दिल्ली, श्रीमान अधीक्षण पुरातत्वविद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भारत सरकार) भोपाल, श्रीमान जिलाधीश महोदय अशोकनगर, श्रीमान अनुविभागीय अधिकारी महोदय मुंगावली को आवेदन पत्र प्रेषित कर मल्हारगढ़ किला को विधिवत राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित कर जीर्णोद्धार हेतु कार्यवाही का निवेदन किया गया है। 
    आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि माननीय सम्मानीयगण अवश्य ही इस दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए हमारी अमूल्य धरोहर को सुरक्षित ही नहीं वरन क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने में अपना बहुमूल्य योगदान प्रदत्त करते हुए  सहभागीदार बनेंगे।

एक दिन तो गुजारिए चंदेरी में

               लेखक

मजीद खां पठान (सदस्य)
जिला पर्यटन संवर्धन परिषद
चंदेरी मध्य प्रदेश

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