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चुनावी महफिलों में भारी पड़ रहे हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

  • Post on 2019-04-10

कानपुर, । लोकसभा चुनाव के मतदान की तारीख ज्यों-ज्यों नजदीक आती जा रही है त्यों-त्यों चुनावी सरगर्मियां बढ़ती जा रही हैं। राजनेता और उम्मीदवार तो अपना प्रचार कर ही रहे हैं पर अब गली, चौराहों और गांवों में चुनावी महफिलें सजने लगी है। इन चुनावी महफिलों में ज्यादातर चर्चा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हो रही है। हालांकि गठबंधन और कांग्रेस के समर्थक भी मोदी के समर्थकों को हर बात का जवाब दे रहे हैं। लेकिन ज्यादातर चुनावी चौपालों में मोदी ही भारी पड़ते दिख रहे हैं, जबकि उम्मीदवारों को लेकर भाजपा समर्थक कम चर्चा कर रहे हैं। 17वीं लोकसभा के चौथे चरण के तहत 29 अप्रैल को कानपुर मण्डल की पांच लोकसभा सीटों पर मतदान होना है। इन सीटों पर उम्मीदवार नामांकन भी करा चुके हैं और चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। जिसको लेकर अब कम समय में चुनावी प्रचार पूरी तरह से एक्शन मोड में जा पहुंचा है। लोकसभा चुनाव की चर्चाएं अब गांव गली और चौराहे, सभी जगह सुनायी देने लगी हैं। विशेष तौर से फुर्सत का वक्त बिताने के लिए चाय-पान के अड्डों और घरों के चबूतरों पर बैठे लोगों में अपनी-अपनी पसंदीदा पार्टियों और नेताओं के विषय में गर्मा-गरम बहसें तेज हो चली हैं। पार्क और मैदानों में प्रातः व सायंकालीन भ्रमण करने वाले वरिष्ठ नागरिक भी चुनावी चर्चाओं में मशगूल रहते हैं। मजेदार यह है कि चुनावी बहस करने वाले लोगों में सभी किसी न किसी राजनीतिक पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर अपनी बात रखते हैं। जैसे कोई मोदी का मुरीद है तो कोई राहुल या प्रियंका का। इन्हीं में कोई मायावती की हिमायत करता है तो कोई अखिलेश को सबसे अच्छा बताकर उनकी वकालत करने लगता है। मोदी का विकल्प फिलहाल अभी नहीं मोतीझील में मार्निंग वाक करने वालों में इन दिनों ज्यादातर चुनावी चर्चा सुनाई देती है। इसी चुनावी चर्चा को सुनने के लिए बुधवार को हिन्दुस्थान समाचार की टीम भी शामिल हो गयी। यहां पर युवा, अधेड़ और बुजुर्ग हर आयु वर्ग के लोग शामिल थे। जो अपनी-अपनी पसंद की पार्टी को बेहतर ठहराने में लगे थे। एक व्यक्ति ने कहा कि कांग्रेस ने अब बदलाव किया है और बेहतर चुनाव लड़ेगी। जिस पर दूसरे व्यक्ति ने कहा कि अंजनी जी मोदी का विकल्प फिलहाल अभी नहीं है, आने वाले दिनों को हम नहीं बता सकते। फिर क्या था कांग्रेस का समर्थन करने वाले कमल शुक्ला और उसके साथी कांग्रेस के घोषणा पत्र को आधार बना कांग्रेस को मजबूत बताने में जुट गये। जिसके बाद भाजपा के समर्थकों ने भारत की सैन्य शक्ति और विदेश नीति आदि मामलों को उठाते हुए कांग्रेस समर्थकों के हर सवाल का जवाब दिया। चाय की दुकानों पर चल रही चुनावी चुस्कियां चाय की दुकानों और पान की गुमटियों में लोग एक-दूसरे से ज्यादातर यही चर्चा करते रहते हैं कि बताओ कैसा है चुनाव का माहौल। ऐसी ही चर्चा बनारसी चाय वाले के यहां देखने को मिली। जहां पर भाजपा और कांग्रेस की चुनावी चुस्कियां चल रही थीं। इसी बीच एक युवा विकास यादव बोल पड़ा कि अखिलेश कहां से खराब हैं। इस पर दद्न चच्चा बोले कि देखो भइया मोदी ने ही शासन पटरी पर लाने का काम किया। तमाम ऐसी योजनाएं हैं, जिनका लोग लाभ ले रहे हैं। तब तक आलम खान तपाक से बोले कि मोदी ने नोटबंदी कर लोगों को बेहाल कर दिया। आलम की बात खत्म नहीं हुई कि विकास फिर बोल पड़ा कि देखो अखिलेश ने एक्सप्रेस वे का तोहफा दिया है। उन्होंने गरीबों को समाजवादी पेंशन दी। विकास पर हावी होते हुए धनंजय सिंह ने कहा कि भाजपा ने देश को मजबूत करने का काम किया। उनका समर्थन करते हुए रमेश ने कहा कि बात तो भाई 100 प्रतिशत सही है। ऐसी ही चुनावी चर्चा ग्रामीण क्षेत्रों में किसानी का काम होने के बावजूद देखने को मिल रही है। हर तरफ हर व्यक्ति अपनी-अपनी पार्टी का समर्थन करता दिख रहा है चाहे भाजपा हो या कांग्रेस या गठबंधन से जुड़ी पाटियां। लेकिन मोदी के कार्यों को जब समर्थन बखान करते हैं तो अन्य पार्टियों के समर्थक कमजोर पड़ जाते हैं।