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मीटू: एमजे अकबर मामले में प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि का आरोप तय

  • Post on 2019-04-10

नई दिल्ली, । दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और पत्रकार एमजे अकबर की ओर से दायर आपराधिक मानहानि के मामले में आज अभियुक्त प्रिया रमानी के खिलाफ आरोप तय किए। सुनवाई के दौरान प्रिया रमानी कोर्ट में मौजूद थीं। उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया। आज कोर्ट ने प्रिया रमानी को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने की स्थाई छूट दे दी। इस मामले में अगली सुनवाई 4 मई को होगी। 4 मई को एमजे अकबर से जिरह की जाएगी। 25 फरवरी को कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और पत्रकार एमजे अकबर द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मामले में पत्रकार प्रिया रमानी को जमानत दी थी। एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने प्रिया रमानी को दस हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी थी। 25 फरवरी को रमानी ने कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट के लिए भी याचिका दायर की थी। इस याचिका का एमजे अकबर के वकील ने विरोध किया था, जिसके बाद रेबेका जॉन ने कहा था कि आपके मुवक्किल एमजे अकबर भी तो कोर्ट नहीं आए हैं।शिकायतकर्ता को तो कोर्ट में खुद मौजूद होना चाहिए। 29 जनवरी को कोर्ट ने प्रिया रमानी को समन जारी किया था । इस मामले में सात लोगों ने अपने बयान दर्ज कराए थे। 11 जनवरी को जिन लोगों के बयान दर्ज हुए उनमें तपन चाकी, मंजर अली और रचना गोयल शामिल हैं। तपन चाकी पेशे से कम्युनिकेशंस कंसल्टेंट हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि वह एमजे अकबर को पिछले 30 सालों से जानता है। जब एमजे अकबर द संडे के संपादक थे तो तपन चाकी उनके लिए लिखा करते थे। चाकी ने बताया था कि एमजे अकबर एक सज्जन व्यक्ति हैं और उनकी छवि एक व्यवहार कुशल और दोस्ताना व्यक्ति की है। जब उन्हें प्रिया रमानी के ट्वीट्स के बारे में जानकारी मिली तो काफी आश्चर्य और दुख हुआ। एमजे अकबर की पूर्व निजी सचिव रचना गोयल ने बताया था कि उन्होंने एमजे अकबर के साथ 10 सालों तक काम किया है। इस दौरान एमजे अकबर का व्यवहार काफी प्रोफेशनल रहा और उनकी कभी कोई शिकायत सुनने को नहीं मिली। उन्हें भी प्रिया रमानी के ट्वीट्स को पढ़ने के बाद काफी धक्का लगा। 25 सालों से एमजे अकबर के निजी सचिव रहे मंजर अली ने कहा था कि उन्होंने प्रिया रमानी के सभी ट्वीट्स के प्रिंटआउट अकबर के दफ्तर में लगे कंप्यूटर से लिए। सात दिसम्बर, 2018 को दो गवाहों ने अपनी गवाही दर्ज कराई थी। गवाही दर्ज कराने वालों में वीनू संदल और सुनील गुजराल शामिल थे। इसके पहले संडे गार्जियन अखबार की संपादक जोयिता बसु ने अपना बयान दर्ज कराया था। 31 अक्टूबर, 2018 को एमजे अकबर ने अपना बयान दर्ज कराया था । एमजे अकबर ने अपने बयान में कहा था कि पत्रकार प्रिया रमानी के झूठे और बेबुनियाद ट्वीट की वजह से उनकी प्रतिष्ठा को गहरी चोट पहुंची। उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा तक देना पड़ा । उन्होंने कहा था कि संपादक और लेखक के रूप में उनकी अच्छी छवि है। उन्होंने कहा था कि प्रिया रमानी के आरोपों ने लोगों की नजर में उनकी छवि को गिराया है। इन आरोपों ने मेरे दोस्तों, मेरे सहयोगियों मेरे राजनीतिक दोस्तों की नजर में गिराने का काम किया है । एमजे अकबर ने कहा था कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक पत्रकार के रूप में की। अपने राजनीतिक करियर के बारे में कहा कि उन्होंने 2014 में सार्वजनिक जीवन शुरू किया था और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने। फिलहाल मैं मध्य प्रदेश से सांसद हूं। उन्होंने कहा था कि प्रिया रमानी के ट्वीट पर मेरा ध्यान अफ्रीका के आधिकारिक दौरे से लौटने के बाद गया। उन्होंने कहा था कि प्रिया रमानी के ट्वीट का संबंध एक मैगजीन में छपे एक आलेख से है। वह आलेख एक इतिहास था और सबसे पहले अक्टूबर 2017 में छपा था। अकबर ने कहा था कि प्रिया रमानी के 10 और 13 अक्टूबर के ट्वीट ने मेरी छवि को काफी नुकसान पहुंचाया। उन ट्वीट को कई जगह छापा गया और सोशल मीडिया पर उसकी चर्चा होती रही। एमजे अकबर ने 15 अक्टूबर 2018 को प्रिया रमानी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था। उन्होंने प्रिया रमानी द्वारा अपने खिलाफ यौन प्रताड़ना का आरोप लगाने के बाद ये आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया।