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आख़िर ये तो होना ही था

  • Post on 2019-02-08

सभी जल्वेदारों को जलवा प्रणाम।🙏 कहते हैं कि बुराई के दिन चार होते हैं और अंत भला तो सब भला। आप सुधिपाठक सोच रहे होंगे कि मैंने अभी कुछ शुरू भी नहीं किया और अंत पर भी पहुँच गया ? दरअसल मैं अब शुरू करता हूँ *विक्रम* विश्व विद्यालय को *"चक्रम"* विश्वविद्यालय बनाने वाले कर्णधार कुलपति प्रोफेसर एस एस (शीलसिन्धु पांडे) ने धारा 14.3 के तहत गुरुवार को कुलपति पद से इस्तीफ़ा दे ही दिया। कयास तो पहले ही लगाए जा रहे थे कि इनके भृष्टाचारी कार्यकाल को देखते हुए इन्हें हटना तय है और इनकी लीला इस तरह समाप्त हुई। *कई मामलों में घिरे थे शीलसिन्धु.....* कुलपति पद पर आसीन होने के साथ ही इनके पिछली जगह के कारनामों का खुलासा होने लगा था और यहाँ भी ज्यादा देर नहीं कि इन्होंने और किताब खरीदी कांड कर डाला *जिसकी शिक़ायत पत्रकार मोहन बैरागी और एक अन्य जागरूक नागरिक ने की थी, जिसे आपके जलवे ने भी प्रमुखता से उठाया था।* इस चर्चित घोटाले की जाँच की आँच से बचने के लिए इन साहब ने कई पैतरे आजमाए और ईओडब्ल्यू में जाँच आज भी लंबित है। *विक्रम से चक्रम बना डाला......* एक समय था जब विक्रम विश्विद्यालय के *कुलपति प्रोफेसर रामराजेश मिश्र* हुआ करते थे और तब इस विश्वविद्यालय का नाम गौरव से लिया जाता था , लेकिन प्रोफेसर पांडे ने कुलपति बनने के बाद जो नाम इसका डुबोया तो *विक्रम से चक्रम* विश्वविद्यालय हो गया। अक्खड़पन और निम्न स्तरीय रवैया इसका मुख्य कारण रहा। छात्र छात्राओं के साथ ही कर्मचारियों को इनके कार्यकाल में जितनी ज़िल्लत और परेशानी नसीब हुई उतनी पहले कभी नहीं हुई। * कारनामों की फ़ेहरिस्त ऐसी कि अच्छे अच्छे तुर्रमखां फेल.....* इन महाशय के कारनामें वैसे तो सर्वविदित हैं लेकिन भृष्ठाचार और किताब कांड के ये मुख्य आरोपी अपने कारनामों को कभी आग के हवाले तो कभी चोरी करवाने के बाद भी छुपा नहीं पाए। *अभी हाल फिलहाल में जो बिल्डिंग निर्माणाधीन है उसमें भी जीभर कर कमीशन डकारा है।निर्दोषों को खूब सताया है, कार्यपरिषद के सदस्यों से झगड़े टंटे किए,पत्रकारों को नोटिस देकर डराया धमकाया,विवाद किए, निर्दोषों पर लाठियां चलवाईं, किसी विश्वविद्यालय में पुलिस चौकी नहीं है लेकिन विश्विद्यालय परिसर में चौकी डलवाई जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं थी। ऐसे कई और मामलों के ख़ुलासे जलवे के अंक में किए जाएंगे।* *अब गेंद सरकार के पाले में.....* अब इस स्थिति में कि जब कुलपति ने धारा 14.3 में इस्तीफ़ा दे दिया है तो ऐसी स्थिति में पहले प्रभारी कुलपति की नियुक्ति होगी और इसके बाद प्रदेश सरकार धारा 52 के तहत कुलपति की नियुक्ति करेगी। *रंगीन मिज़ाज पार्षद पतिऔर चप्पल कुटाई.....* जाते जाते एक ख़बर की ब्रेकिंग आप से साझा करना चाहता हूँ कि *पिछले दिनों एक रंगीन मिज़ाज भाजपा पार्षद पति चप्पल कुटाई से काफी मशहूर हो गया। दरअसल हुआ कुछ यूं कि ये रंगीनियों के शौकीन पार्षद पति एक किराने वाली भाभी के साथ फ्रीगंज की एक होटल में रंग रलियाँ मनाते हुए रंगे हाथों पकड़ लिए गए, मुख़बिर की सूचना पर पार्षद महोदया ने अपने आशिक़ मिज़ाज पति को मौके से पकड़ लिया। फिर क्या था पार्षद पति पत्नी के पैरों में गिर कर इज्जत की दुहाई देने लगे और फिर ऐसे कर्म को ना करने की दुहाई देते हुए बच तो गए , लेकिन उस किराने वाली भाभी की पार्षद ने चप्पलों से धुलाई कर डाली बीच बचाव में पति भी इस कुटाई समारोह में चप्पल खाने से बच नहीं सके। बंद कमरे में हुई इस चप्पल कुटाई की कहानी , किस्सों की जुबानी पुराने शहर के गलियारों में खूब चटखारे ले ले कर सुनि सुनाई जा रही है। इस कहानी के असल पात्रों का खुलासा अगले अंक में किया जाएगा...जय जिनेन्द्र।* चलिये अब चलता हूँ फिर मिलने के वादे के साथ तब तक आप अपना जलवा बरक़रार रखें, दुनिया जले तो जलने दें।...................................... आप जल्वेदारों में से एक जल्वेदार..... *जय कौशल✍🧐🏹* उज्जैन (म.प्र.) 09827560667 07000249542