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राफेल पर चिट्ठी सामने से मोदी सरकार ने दी सफाई

  • Post on 2019-02-08

नई दिल्ली । आम चुनावों से पहले संसद के बजट सत्र में विपक्ष एक बार फिर राफेल सौदे का मुद्दा उठा रहा है। इस मामले की ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (जेपीसी) की मांग ‎कांग्रेस ने दोहरा है। विपक्ष ने मीडिया में प्रकाशित राफेल सौदे से जुड़े तथ्यों का हवाला देते हुए एक बार फिर अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि ताजा तथ्यों से साफ है कि राफेल सौदे में प्रधानमंत्री कार्यालय का हस्तक्षेप था, अब उन्हें सिर्फ जेपीसी पर भरोसा है। एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित सरकारी दस्तावेज दावा कर रहा है कि रक्षा मंत्रालय ने राफेल सौदे के संदर्भ में रक्षा मंत्री को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में रक्षा मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा राफेल सौदे में समानांतर बातचीत से रक्षा मंत्रालय की नेगोशिएशन टीम की कोशिशों को धक्का लग सकता है। मंत्रालय की ओर से रक्षा मंत्री को गए इस पत्र को मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी एसके शर्मा ने 24 नवंबर 2015 को जारी किया और इस पत्र को मंत्रालय में रक्षा सौदों के लिए जिम्मेदार डायरेक्टर जनरल एक्विजिशन की सहमति थी। वहीं इस पत्र को आधार बनाते हुए दिन की संसद की कारवाई में तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने सवाल ‎किया कि जब राफेल विमान खरीदने के लिए रक्षा मंत्रालय और फ्रांस सरकार के बीच बातचीत जारी थी तो क्यों प्रधानमंत्री कार्यालय से हस्तक्षेप किया गया। वहीं इन्हीं तथ्यों के आधार पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और एयर चीफ मार्शल इस मुद्दे पर अलग-अलग बात कह रहे हैं तब सच्चाई उजागर करने के लिए सिर्फ जेपीसी जांच पर ही भरोसा ‎किया जा सकता है। इन तथ्यों के सामने आने से और विपक्ष के आरोपों के बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में सरकार की तरफ से सफाई दी। रक्षा मंत्री ने कहा कि राफेल मामले पर सभी आरोपों को खारिज किया जा चुका है और सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश के सामने है। लिहाजा, विपक्ष सिर्फ गड़े मुर्दे उखाड़ने का काम कर रहा है।