जीवन मंत्र

राशिफल

शुभ संवत 2075 शाके 1940 सौम्य गोष्ठ पौष, शुक्ल पक्ष, हेमंत ऋतु, गुरु उदय पूर्वे शुक्रोदय पूर्वे तिथि षष्ठी, शनिवासरे, उ.मा. नक्षत्रें, परिध योगे, तैतिलकरणे, मीन की चंद्रमा, व्यापार मुर्हूत, पंचक समाप्त दिन सु. 8/18 व्यापार मुर्हूत, तथापि उत्तर दिशा की यात्रा शुभ होवें। आज जन्म लिया बालक का फल........ आज जन्म लिया बालक सुन्दर, सुशील, कोमल हृदय वाला, जिद्दी-हठी, स्वाभिमानी, बातूनी तथा महन्त, सफेद वस्तु, सोना-चांदी का व्यापारी तथा चूना-छुई, जरकिन, हीरा, मोती का कुशल व्यापारी होगा। मेष राशि :- मनोबल उत्साह वर्धक रहे, कार्य गति में सुधार होगा, शुभ समाचार अवश्य मिलेगा। वृष राशि :- कुछ बाधायें, कष्ट, स...

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हनुमानजी की पूजा में रखें इन बातों का ध्यान

भगवान राम के सबसे प्रिय भक्त हनुमानजी हर संकट को दूर करते हैं, इसलिए उन्हें संकटमोचन के नाम से भी जाना जाता है। यह इसलिए कि हनुमानजी का जप करने से बड़ी से बड़ी परेशानियां दूर भाग जाती हैं। शास्त्रों और पुराणों में हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष बताया गया है। यही कारण है मंगलवार और शनिवार को सबसे ज्यादा हनुमान जी की पूजा होती है पर हनुमान जी के भक्त कई बार जाने-अनजाने ऐसी भूल कर बैठते हैं जिससे उन्हें पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता है। मंगलवार और शनिवार के दिन भूलकर भी काले या सफेद कपड़े पहनकर हनुमान जी की पूजा न करें। हनुमान जी को लाल और केसर...

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माता लक्ष्मी की कृपा चाहिये तो घर में न रखें ये चीजें

हर व्यक्ति अपने घर में हमेशा सुख, समृद्धि चाहता है लेकिन कई बार कुछ छोटी-छोटी गलतियों की वजह से उनके ऊपर माता लक्ष्मी की कृपा नहीं हो पाती। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में कई बार कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिसकी हम अनदेखी कर देते हैं लेकिन यही अनदेखी नुकसान और परेशानी की वजह बन जाती है। वास्तु शास्त्र में घर पर मकड़ी के जाले को अशुभ माना जाता है इसलिए मकड़ी का जाला घर में न लगने दें। इससे उलझन और परेशानी बढ़ती है। टूटे हुए आईने से हमेशा नकारात्मक ऊर्जा निकलती रहती है इसलिए घर में जब भी कोई दर्पण या शीशा टूट जाए तो उसे घर से बाहर कर दें। घर में चमगादड़ का प्रवेश अशुभ माना गया है।...

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भैरव अष्टमी पर ऐसे करें काल भैरव का पूजन, जानिए 6 काम की बातें...

मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी काल भैरवाष्टमी के रूप में मनाई जाती है। इस दिन भगवान महादेव ने काल भैरव के रूप में अवतार लिया था। काल भैरव भगवान महादेव का अत्यंत ही रौद्र, भयाक्रांत, वीभत्स, विकराल प्रचंड स्वरूप है। भैरवजी को काशी का कोतवाल भी माना जाता है। काल भैरव के पूजन से अनिष्ट का निवारण होता है। * काल भैरवाष्टमी के दिन मंदिर जाकर भैरवजी के दर्शन करने से पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। * उनकी प्रिय वस्तुओं में काले तिल, उड़द, नींबू, नारियल, अकौआ के पुष्प, कड़वा तेल, सुगंधित धूप, पुए, मदिरा, कड़वे तेल से बने पकवान दान किए जा सकते हैं। * उन्हें जलेबी एवं तले पापड़ या उड...

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देवउठनी एकादशी के उपाय

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु नींद से जागते हैं। इसलिए इस तिथि को देवप्रबोधिनी व देवउठनी एकादशी कहा जाता है। हिन्दू धर्म में इस तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए यदि विशेष उपाय किए जाएं तो विशेष फल मिलता है और साधक की मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। ये उपाय इस प्रकार हैं- देवउठनी एकादशी के उपाय | Dev Uthani Ekadashi Ke Upay 1. देवउठनी एकादशी की शाम तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक लगाएं और ऊँ वासुदेवाय नम: मंत्र बोलते हुए तुलसी की 11 परिक्रमा करें। इस उपाय से घर में सुख-शांति बनी रहती है और किसी भी ...

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दीपावली पर विशेष (श्री गणेश महालक्ष्मी पूजन) डॉ.पीएल गौतमाचार्य श्री गणेश लक्ष्मीन्द्र प्रभु, ऋद्धि-सिद्ध दातार। आन विराजो आज मह, कर दो मम उद्धार।।

7 नवम्बर 2018 कार्तिक कृष्ण अमावस्या बुधवार में श्री महालक्ष्मी पूजन (दीवाली) पर्व मान्य रहेगा। गणितानुसार इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष में अमावस्या तिथि रात्रि 9/39 तक रहेगी लक्ष्मी पूजन के लिए अति उत्तम मानी जायेगी। स्वाती नक्षत्र सायं 7/36 मिनट तक रहेगा। आचुत्य मान योग सायं 5/56 बजे तक उपरांत सौभाग्य योग भोगेगा, बुधवार में स्वाती आ जाने से बना ध्रूम योग मध्यम रहेगा। स्वाती नक्षत्र चर चल संज्ञक उद्योग धंधे दुकानदार व्यापारियों के लिए श्रेष्ठ हैं। दीपावली लक्ष्मी जी की उत्पत्ति होने से सभी तरह के काम धंधे वालों के लिए शुभ मानी गई हैं। लक्ष्मी पूजन में दिन के लग्न मुर्हूत- कुछ...

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(नवरात्र-नवमां दिन) अपने भक्तों को रिद्धि सिद्धि प्रदान करती हैं देवी सिद्धिदात्री

दुर्गा पूजा का नवम दिन देवी सिद्धिदात्री की करें पूजा आठ रूप हैं मंगलकारी नवी सिद्धि देने वाली। नौ प्रकृति हैं मां दुर्गा की कहलाती हैं शेरावाली। शेरोंवाली मईया जगत के कल्याण हेतु नौ रूपों में प्रकट हुई और इन नौ रूपों में अंतिम रूप है देवी सिद्धिदात्री का । यह देवी प्रसन्न होने पर सम्पूर्ण जगत की रिद्धि सिद्धि अपने भक्तों को प्रदान करती हैं। देवी सिद्धिदात्री का रूप अत्यंत सौम्य है। देवी की चार भुजाएं हैं दायी भुजा में माता ने च और गदा धारण किया है और मां की बांयी भुजा में शंख और कमल का फूल है। मां सिद्धिदात्री कमल आसन पर विराजमान रहती हैं, मां का एक अन्य वाहन है सिंह। द...

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(नवरात्रि आठवां दिन) आठवां स्वरूप हैं देवी गौरी का

कालरात्रि सातवीं मूरत आठवी गौरा रूप। नवरूप धरा देवी ने करने जगत को अभिभूत।। महादेवी महालक्ष्मी ने भक्तों के कल्याण हेतु जिन नौ रूपों में प्रकट हुई उनमें से आठवां स्वरूप हैं देवी गौरी का । दुर्गा सप्तशती में शुभ निशुम्भ से पराजित होकर गंगा के तट पर जिस देवी की प्रार्थना देवता गण कर रहे थे वह महागौरी हैं। देवी गौरी के अंश से ही कौशिकी का जन्म हुआ जिसने शुम्भ निशुम्भ के प्रकोप से देवताओं को मुक्त कराया। यह देवी गौरी शिव की पत्नी हैं यही शिवा और शाम्भवी के नाम से भी पूजित होती हैं। कथाओं में उल्लेख है कि जब देवी उमा शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या कर रही थी उ...

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(नवरात्रि-सातवां दिन) सातवां रुप कालरात्रि का

कालरात्रिमर्हारात्रिर्मोहरात्रिर्श्च दारूणा। त्वं श्रीस्त्वमीर्श्वरी त्वं ह्रीस्त्वं बुद्धिर्बोधलक्षणा।। मधु कैटभ नामक महापरामी असुर से जीवन की रक्षा हेतु भगवान विष्णु को निद्रा से जगाने के लिए ब्रह्मा जी ने इसी मंत्र से मां की स्तुति की थी। यह देवी कालरात्रि ही महामाया हैं और भग्वान विष्णु की योगनिद्रा हैं। इन्होंने ही सृष्टि को एक एक दूसरे से जोड़ रखा है। दुर्गा सप्तशती के प्रधानिक रहस्य में बताया गया है कि जब देवी ने इस सृष्टि का निर्माण शुरू किया और ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश का प्रकटीकरण हुआ उसस पहले देवी ने अपने स्वरूप से तीन महादेवीयों को उत्पन्न किया। स...

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(नवरात्रि-छठवां दिन) कामना पूरी करती है देवी कात्यायिनी

सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हृदि संस्थिते। स्वर्गापवर्गदे देवी कात्यायनी नमोस्तुते। दुर्गा पजा के छठे दिन जिस देवी की पूजा का महात्मय है वह हैं देवी कात्यानी। देवी कात्यायिनी की जो व्यक्ति श्रद्धा भक्ति सहित पूजा करते देवी उनकी सभी प्रकार की कामना पूरी करती हें और व्यक्ति यश और सम्मान के साथ जीवन यापन करके अंत समय में देवी के लोक में स्थान प्राप्त करते हें। देवी मां की महिमा के विषय में जानने से पहले आप मां के स्वरूप को अपनी आंखों में बसा लीजिए। कहा भी गया है कि निर्गुण रूप से सगुण ब्रह्म की उपासना आसान होती है इसिलए हमें भी मां के स्वरूप को अपने मन में बसा लेना चाहिए। ...

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(नवरात्रि - पांचवां दिन) भगवती की शक्ति माता स्कन्ध

सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये स्कन्दमाता नमोस्तु ते।। छान्दोग्य श्रुति के अनुसार भगवती की शक्ति से उत्पन्न सनतकुमार का एक अन्य नाम स्कन्द भी है। भगवान स्कन्द की माता होने के कारण देवी स्कन्द माता के नाम से जानी जाती हैं दुर्गा पूजा के पांचवे दिन देवताओं के सेनापति कुमार कार्तिकेय की माता की पूजा होती है। कुमार कार्तिकेय को ग्रंथों में सनतकुमार, स्कन्द कुमार के नाम से पुकारा गया है। माता इस रूप में पूर्णतऱ ममता लुटाती हुई ऩजर आती हैं। माता का पांचवा रूप शुभ्र अर्थात स्वेत है। माता की चार भुजाएं हैं और ये कमल आसन पर विराजमान हैं। जब अत्य...

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(नवरात्रि - चौथा दिन)देवी कूष्माण्डा इस चराचार जगत की अधिष्ठात्री

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवी कूष्मांडा नमोस्तु ते।। देवी महात्मय के प्रधानिक रहस्य में जिस महालक्ष्मी देवी से आदि देव और महादेवियों का जन्म हुआ उस महाशक्ति भगवती का एकीकृत रूप है नवदुर्गा। मां दुर्गा के नव रूपों में चौथा रूप है कुष्मांडा देवी का दुर्गा पूजा के चौथे दिन हमें इसी देवी की उपासना करनी चाहिए। दुर्गा सप्तशती के कवच में लिखा है कुत्सितऱ ऊष्मा कूष्मा-त्रिविधतापयुत-संसार स अण्डे मांसपेश्यामुदररूपायां यस्याऱ सा कूष्मांडा। इसका अर्थ है वह देवी जिनके उदर में त्रिविध तापयुक्त संसार स्थित है वह कूष्माण्डा हैं। देवी कूष्माण्डा इस चर...

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चन्द्रघंटा देवी का स्वरूप तपे हुए स्वर्ण के समान कांतिमय

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकै र्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।। यह देवी चन्द्रघंटा का ध्यान मंत्र है। दुर्गा पूजा के तीसरे दिन आदिशक्ति दुर्गा के तीसरे रूप की पूजा होती है। मां का तीसरा रूप चन्द्रघंटा का है। देवी चन्द्रघण्टा भक्त को सभी प्रकार की बाधाओं एवं संकटों से उबारने वाली हैं। इस दिन का दुर्गा पूजा में विशेष महत्व बताया गया है। चन्द्रघंटा देवी का स्वरूप तपे हुए स्वर्ण के समान कांतिमय है। चेहरा शांत और सौम्य एवं मुखरे पर सूर्यमंडल की आभा छिटक रही है। अपने इस रूप से माता देवगण, संतों एवं भक्त जन के मन को संतोष एवं प्रसन्न प्रदान कर रही...

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(शारदीय नवरात्र पर विशेष) नवरात्रि में माँ दुर्गा के औषधि रूपों का पूजन करें

माँ जगदम्बा दुर्गा के नौ रूप मनुष्य को शांति, सुख, वैभव, निरोगी काया एवं भौतिक आर्थिक इच्छाओं को पूर्ण करने वाले हैं। माँ अपने बच्चों को हर प्रकार का सुख प्रदान कर अपने आशीष की छाया में बैठाकर संसार के प्रत्येक दुख से दूर करके सुखी रखती है। जानिए नवदुर्गा के नौ रूप औषधियों के रूप में कैसे कार्य करते हैं एवं अपने भक्तों को कैसे सुख पहुँचाते हैं। सर्वप्रथम इस पद्धति को मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया परंतु गुप्त ही रहा। भक्तों की जिज्ञासा की संतुष्टि करते हुए नौ दुर्गा के औषधि रूप दे रहे हैं। इस चिकित्सा प्रणाली के रहस्य को ब्रह्माजी ने अपने उपदेश में दुर्ग...

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11 दिन धरती पर सबके अतिथि बन निवास करेगें गणपति बप्पा   

हमारे मन मंदिर में बसनेवाले विघ्नहर्ता भगवान गणेश इस वर्ष 13 सितम्बर को एक बार फिर हम सभी के घरों में 11 दिनों तक अतिथि स्वरूप रहने के लिए आ रहे हैं. महाराष्ट्र के अलावा भारत में हर साल गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी पर लोग अपने घरों में भगवान गणेश की स्थापना करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि 11 दिन तक विघ्नहर्ता भगवान गणेश धरती पर निवास करते हैं. गणेश उत्सव भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से चतुर्दर्शी तक चलता है. कहते हैं चतुर्थी के ही दिन सभी देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता भगवान गणेश जी का जन्म मध्यकाल में हुआ था. मान्यता है कि बुद्धि के देवता ...

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सूर्य पूजा के साथ करें शिव आराधना

सावन माह के दूसरे दिन रविवार को भगवान भोले नाथ और माता शक्ति की एक साथ पूजा करें और साथ में सूर्य की भी पूजा करें इससे आपको संतान सुख, वैभव, धन और वर्चस्व की प्राप्ति होगी। सबसे पहले रविवार को स्नान के पश्चात पूजास्थल में विराजित शिवलिंग या शिव पार्वती की तस्वीर का विधिवत पूजन करें। लाल और पीले रंग के वस्त्र पहनें तो अति उत्तम रहेगा। इसके बाद पूर्व मुखी होकर कुशा के आसन पर बैठ कर पूजा करें। दिया जलायें, शिव जी और सूर्य देव पर जल चढ़ायें। शिवलिंग पर धतूरे के पुष्प, अकौड़े के पुष्प और बेलपत्र अर्पित करें। जल में गुड़ मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें तथा जायफल हाथ में लेकर नीचे ल...

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