जीवन मंत्र

नारियल चढ़ाकर पा सकते है बाप्पा से मनचाहा वरदान

बाप्पा के आपने कई रुप देखे होंगे, लेकिन मध्यप्रदेश के महेश्वर में गजानन की गोबर की मूर्ति है। ये मूर्ति हजारों साल पुरानी है, कहते हैं यहां नारियल चढ़ाकर पा सकते है बाप्पा से मनचाहा वरदान। माथे पर मुकुट, गले में हार, और खूबूसरत श्रृंगार बाप्पा के इस मनमोहक रूप में छिपा है। भक्तों के हर दुख दर्द का इलाज। गणपति का ये रुप मन मोह लेता है और हैरान भी करता है क्योंकि यहां गणपति को गोबर गणेश के नाम से पुकारते हैं भक्त। मध्य प्रदेश के नीमाड़ क्षेत्र में माहेश्वर कस्बे में बाप्पा देते हैं बड़े ही भव्य रूप में दर्शन। माहेश्वर में महावीर मार्ग पर बनी गणपति की ये प्रतिमा गोबर और मिट्ट...

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मंदिर के एक स्तंभ से सुनाई देते हैं संगीत के सुर

बसंत पंचमी पर सरस्वती माता की पूजा का विशेष विधान है। सरस्वती को विद्या की देवी माना जाता है। सरस्वती माता के इस मंदिर के बारे में तरह-तरह की किवदंतियां प्रचलित है। यह मंदिर आंध्र प्रदेश के बासर गांव में गोदावरी नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर में केंद्रीय रूप से सरस्वती माता की भव्य प्रतिमा स्थापित है, उनके साथ लक्ष्मी माता भी यहां विराजमान हैं। सरस्वती देवी की मूर्ति लगभग 4 फुट की ऊंची है। यहां वह पद्मासन मुद्रा में है। इस मंदिर की सबसे खास बात है कि मंदिर के एक स्तंभ से संगीत के सातों स्वर सुनाई देते हैं, इसी विशेषता के चलते भक्त यहां खींचे चले आते हैं। कोई भी ध्यानपूर्व...

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एकाग्रता से मिलता है लक्ष्य

हमें शुरुआत से ही बार-बार ध्यान लगाकर काम करने की सीख दी जाती है पर वर्तमान में इस पर गौर किया जाए, तो ध्यान की कमी नजर आती है। एकाग्रता के संबंध में धनुर्धर अर्जुन से सीख लें। अर्जुन को अपने लक्ष्य के अतिरिक्त कुछ दिखाई नहीं देता था। जब मन एक कार्य पर एकाग्र होता है, उस समय ध्यान की तीव्रता अत्यधिक बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप आप कार्यों को भली-भांति संपन्न करते हैं। आज के समय में जब प्रतियोगिता इतनी अधिक बढ़ गई है तो गहन कार्य या पूर्ण एकाग्रता के साथ काम करना न सिर्फ समय का सदुपयोग है, बल्कि समय नियोजन भी है। अस्त-व्यस्त दिनचर्या की अगर कोई काट है तो वह मानसिक एकाग्रता के साथ ...

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कुंडली से पता चलते हैं कलह और मधुरता के योग

दाम्पत्य में जीवन साथी अनुकूल हो तो हर तरह की परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है लेकिन यदि दाम्पत्य जीवन में दोनों में से किसी भी एक व्यक्ति का व्यवहार यदि अनुकूल नहीं रहता है तो रिश्ते में कलह और परेशानियों का दौर लगा रहता है। ज्योतिषशास्त्र में जातक की जन्म कुंडली को देखकर, यह अनुमान लगाया जा सकता है कि आपके दाम्पत्य जीवन में कलह के योग कब उत्पन्न हो सकते हैं। जीवन में कब बनते हैं कलह के योग- कुंडली में सप्तम या सातवाँ घर विवाह और दाम्पत्य जीवन से सम्बन्ध रखता है। यदि इस घर पर पाप ग्रह या नीच ग्रह की दृष्टि रहती है तो वैवाहिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।...

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एकादशी, कैसे करें ये व्रत और क्या है कार्तिक एकादशी का महत्व

एकादशी को पुराणों में सभी व्रतों में महत्वपूर्ण बताया गया है। ये व्रत साल में 24 बार किया जाता है यानी एक महीने में 2 बार एकादशी का व्रत किया जाता है। इनमें भी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवउठनी एकादशी और भी खास है। इस दिन भगवान विष्णु 4 महीने की योग निद्रा से जागते हैं। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करता है उसके कई जन्मों के पाप कट जाते हैं और व्यक्ति विष्णु लोक में स्थान प्राप्त करता है। कैसे करें ये व्रत - देवउठनी एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को एकादशी से एक दिन पहले दशमी के दिन मांस, प्याज, लहसुन, म...

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दिवाली / लक्ष्मी जी की पूजा इस आरती से होती है पूरी, साथ ही जानिए पूरी विधि

कार्तिक माह की अमावस्या यानी दिवाली पर लक्ष्मी जी की पूजा और आरती का खास महत्व होता है। आरती के बिना पूजा अधूरी होती है। दिवाली पर लक्ष्मी जी की आरती में कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है। दिवाली की आरती घी की बत्तियों से करनी चाहिए। आरती में अपनी श्रद्धा के अनुसार बत्तियों की संख्या एक, पांच, नौ, ग्यारह या इक्किस हो सकती है। कुछ लोग लक्ष्मी जी की आरती मंत्रों से करते हैं लेकिन ऊँ जय लक्ष्मी माता, आरती बहुत से लोग करते हैं। ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्...

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दिवाली पर लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

दिवाली का त्योहार पांच दिनों तक चलता है। इसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज आदि मनाए जाते हैं, जिसमें सबसे अहम तीसरा यानी बड़ी दिवाली (लक्ष्मी पूजन) का दिन होता है। धनतेरस से भाई दूज तक मंदिरों और घरों को रंग बिरंगी खूबसूरत रौशनी से सजाया जाता है। इस बार दिवाली का त्योहार 7 नवंबर के दिन मनाया जाएगा। त्योहार के दिल तारीख धनतेरस 5 नवंबर 2018 छोटी दिवाली/ नरक चतुर्दशी 6 नवंबर 2018 बड़ी दिवाली/ लक्ष्मी पूजन 7 नवंबर 2018 गोवर्धन पूजा 8 नवंबर 2018 भाई दूज 9 नवंबर 2018 त्योहारों का महत्व- धनतेरस के दिन नए बर्तन, सोने के सिक्के, ...

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(करवा चौथ पर विशेष ) इसलिए सुहागिनें रखती हैं करवा चौथ का व्रत

यह तो दुनिया जानती है कि भारतीय महिलाएं करवा चौथ का व्रत अपने पति के लिए रखती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। इसके लिए महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और फिर पूजापाठ करती हैं। इस वर्ष 27 अक्टूबर को करवा चौथ है, ऐसे में यहां प्रस्तुत है करवा चौथ व्रत करने के नियम व कुछ सावधानियां। गौरतलब है कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। इस दिन महिलाएं जिस मिट्टी के टोटीनुमा पात्र से जल अर्पित करती हैं उसे ही करवा कहा जाता है और चौथ चतुर्थी तिथि को कहते हैं। इस दिन मुख्यरुप से भगवान गणेश, मां गौरी और चंद्रमा की पूजा की जाती है। जहां तक व्रत के नियमो...

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(नवरात्र विशेष ) प्रथम शैलपुत्री

भगवती दुर्गा का प्रथम स्वरूप भगवती शैलपुत्रीके रूप में है। हिमालय के यहां जन्म लेने से भगवती को शैलपुत्रीकहा गया। भगवती का वाहन वृषभ है, उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बायें हाथ में कमल का पुष्प है। इस स्वरूप का पूजन आज के दिन किया जाएगा। आवाहन, स्थापना और विसर्जन ये तीनों आज प्रातरूकाल ही होंगे। किसी एकांत स्थल पर मृत्ताका से वेदी बनाकर उसमें जौ, गेहूं, बोयें। उस पर कलश स्थापित करें। कलश पर मूर्ति स्थापित करें, भगवती की मूर्ति किसी भी धातु अथवा मिट्टी की हो सकती है। कलश के पीछे स्वास्तिकऔर उसके युग्म पार्श्व में त्रिशूल बनायें। जिस कक्ष में भगवती की स्थापना करें, उस कक...

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दस दिन रहेगा भगवान गणेश की आराधना का दौर

सनातन धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरुआत भगवान गणेश के नाम के साथ ही होती है। साल में एक बार गणेश चतुर्थी का पर्व आता है। गणेश चतुर्थी में लोग गणपति को लुभाने के लिए तरह-तरह की पूजा करते हैं। गणेश को मोदक और दुर्वा घास अधिक प्रिय है, लेकिन अगर गणेश चतुर्थी पर आप घर में खुद ही प्रतिमा को बनाए और इसकी पूजा करें तो गणपति वश्य ही प्रसन्न होते हैं और मनवांछित मुराद पुरी करते हैं। गणेश चतुर्थी पर हर घर में गणेश विराजमान होते हैं। हर गली मोहल्ले में गणपति बाप्पा मोरया की गूंज सुनाई देती है। गणेश चतुर्थी महोत्सव 13 सितंबर से शुरू हो रहा है, जो 23 सितंबर तक चलेगा। अभीष्ट सिद्धि के लिए इस ...

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देशभर में आज रक्षाबंधन के त्योहार की धूम, भाई के कलाई पर राखी बांधने का यह है शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली: : रक्षाबंधन का त्योहार आज पूरे भारतवर्ष में धूमधाम से मनाया जाएगा. आज के इस खास दिन पर सभी बहनें अपने-अपने भाइयों के कलाइयों पर राखी बांधेंगी. रक्षाबंधन को लेकर देशभर के बाजारों में धूम है. सड़कों पर चहल-पहल बढ़ गई है. बाजारों में छोटी बड़ी, महंगी सस्ती, रंग बिरंगी राखियां सज गई हैं. रक्षा बंधन के पर्व पर बात सिर्फ राखी या धागे की होती है, लेकिन इस मौके पर भाई के माथे पर तिलक लगाना, मिठाई खिलाना और आरती उतारना भी त्योहार की कुछ महत्वपूर्ण रस्में हैं. इसके लिए बाजार में रक्षाबंधन की थाली भी उपलब्ध है, जिसमें राखी के अलावा तिलक के लिए अक्षत और चावल, सिर पर रखने के लिए कपड़...

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रक्षा बंधन का महत्व

रक्षा बंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस त्योहार का इंतजार सिर्फ भाई-बहन ही नहीं बल्कि परिवार के सभी सदस्य करते हैं। हिंदू पंचाग के अनुसार यह पावन पर्व 26 अगस्त (रविवार) को मनाया जाएगा। रक्षा बंधन के दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं। साथ ही बहनें ईश्वर से भाई की दीर्घ आयु, सफलता और समृद्धि की कामना भी करती हैं। वहीं भाई अपने बहनों को यह वचन देते हैं कि वह हमेशा उनकी रक्षा करेंगे। शुभ मूहुर्त आमतौर पर यह तिथि अक्सर भद्राकाल से पीड़ित होती है। परंपरा के अनुसार, भद्राकाल में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है, इसलिए इस अवधि में राखी बांधना व...

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गायत्री मंत्र से आतीं हैं जीवन में खुशियां

गायत्री मंत्र का उच्‍चारण करने से व्‍यक्ति के जीवन में खुशियों का संचार होता है। चारों वेदों से मिलकर बने इस मंत्र का जाप करने से शरीर निरोग बनता है और इंसान को यश, प्रसिद्धि और धन की प्राप्ति भी होती है। गायत्री मंत्र के फायदे हिन्दू धर्म में गायत्री मंत्र को विशेष मान्यता प्राप्त है। कई शोधों द्वारा यह भी प्रमाणित किया गया है कि गायत्री मंत्र के जाप से कई फायदे भी होते हैं जैसे : मानसिक शांति, चेहरे पर चमक, खुशी की प्राप्ति, चेहरे में चमक, इन्द्रियां बेहतर होती हैं, गुस्सा कम आता है और बुद्धि तेज होती है। गायत्री मंत्र ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः...

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रामचरित मानस के दोहों से भी मिलती है शिव कृपा

सावन के महीने में रामचरित मानस के दोहों से भी शिव कृपा मिलती है। यहां तक कि जीवन की हर समस्या का समाधान इन दोहों में ही छिपा हुआ है। रामचरित मानस के दोहों में शिव कृपा का ज्ञान समाहित है। रामचरितमानस के कई दोहों से शिव उपासना की जा सकती है। शिव कृपा दिलाने वाले दोहे जिनका पाठ करने से हर समस्या का समाधान मिल जाता है। पहला श्लोक पहला श्लोक है - वन्दे बोधमयं नित्यं गुरु, शंकर रूपिणम। यमाश्रितो हि वक्रोपि , चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते। इस श्लोक में शिव जी को गुरु रूप में प्रणाम करके उनकी महिमा बताई गई है। कोई भी पूजा उपासना करने के पूर्व इस श्लोक को पढ़ लेना चाहिए ताकि पूजा का पूर...

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अधर्म से बचें क्योंकि हनुमानजी देख रहे

हनुमानजी त्रेतायुग में जन्में लेकिन श्रद्धालुओं का विश्वास है कि वो इस कलयुग में भी विद्ययमान हैं। इसलिए हनुमानजी के जीवन से जहां बहुत कुछ सीखा जा सकता है, वहीं उनके होने का आभास भी किया जा सकता है। त्रेतायुग में बजरंगबली विषम परिस्थितियों का जब सामना करते थे, तो पूरी तरह वो जागरुक रहते थे। उनके जीवन में अनेक दफा ऐसी परिस्थितियां आईं जबकि उन्हें सहमति और विरोध करना पड़ा। ऐसे समय में उन्होंने बेहतर तरीके से खुद को उबारा। उन्होंने भगवान श्रीराम यानी धर्म के विषय में जब भी बात आई अपनी पूर्ण सहमति दी, और जब अधर्म सामने आया तो उसका डटकर मुकाबला भी किया और असहमति भी जताई। गौर...

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नीले रंग की बोतल से पीएं जल भागेंगे रोग, जानें और भी हैं ढेरों लाभ

नीले रंग के साथ, स्नेह, सौजन्य, शांति, पवित्रता जैसी प्रवृत्तियां जुड़ती हैं। मनोविज्ञान के अनुसार नीला रंग बल, पौरुष और वीर-भाव का प्रतीक है। जिस महापुरुष में जितना ही अधिक बल-पौरुष है, दृढ़ता, साहस, शौर्य है, कठिन से कठिन परिस्थितियों में निरंतर सत्य,नीति धर्म के लिए संघर्ष करने की योग्यता है, वचनों में स्थायित्व है, संकल्पशक्ति और धीरता है, उसे उतने ही नीले रंग से चित्रित किया जाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचंद्र तथा लीला पुरुषोत्तम योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण दोनों का सम्पूर्ण जीवन मानवता की रक्षा एवं दानवता के विरुद्ध युद्ध करने में व्यतीत हुआ था। इन दोनो...

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लखदाता पीर निगाह: श्रद्धालुओं-पर्यटकों को लुभाता है ये स्थान, कुष्ठ रोगी होते हैं स्वस्थ

जय लखदाता पीर’ के उद्घोष के साथ श्रद्धालु पीर निगाह पहुंचते हैं। यह पावन स्थल हिमाचल प्रदेश में ऊना के बसौली में स्थित है। यहां ठोस चट्टान में खुदी गुफाएं श्रद्धालुओं को ही नहीं, पर्यटक जनों को भी लुभाती हैं। श्रद्धालु यहां मन्नतें पूरी होने पर शीश नवाते हैं तो दूसरों के लिए एक संकरी चट्टान और ये गुफाएं कौतूहल का विषय रहती हैं। पीर निगाह दो शब्दों का सुमेल है- पीर और निगाह। एक वृत्तांत के अनुसार यहां से 6-7 किलोमीटर दूर एक गांव सैली है। यहां एक ब्राह्मण परिवार बसता था। परिवार के निगाहिया नाम के व्यक्ति को कुष्ठ रोग था। परिवार के लोग उससे घृणा करते थे इसलिए परिवार को छोड़ ...

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घर का चिराग होता है ऐसा बेटा, स्वयं को परखें

गुप्ता जी जब लगभग पैंतालीस वर्ष के थे तब उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो गया था। लोगों ने दूसरी शादी की सलाह दी परंतु गुप्ता जी ने यह कह कर मना कर दिया कि पुत्र के रूप में पत्नी की दी हुई भेंट मेरे पास है इसी के साथ पूरी जिंदगी अच्छे से कट जाएगी। पुत्र जब वयस्क हुआ तो गुप्ता जी ने पूरा कारोबार उसके हवाले कर दिया और स्वयं कभी मंदिर और कभी आफिस में बैठकर समय व्यतीत करने लगे। पुत्र की शादी के बाद गुप्ता जी और अधिक निश्चिंत हो गए। पूरा घर बहू के सुपुर्द कर दिया। पुत्र की शादी के लगभग एक वर्ष बाद दुपहरी में गुप्ता जी खाना खा रहे थे, पुत्र भी आफिस से आ गया था और हाथ-मुंह धोकर खाना खाने की त...

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लड़का हो या लड़की मन की गुप्त बातें जानने का ये है सटीक तरीका

यहां हम आपको एक मजेदार मनोरंजक जादू का रहस्य बताने जा रहे हैं। वास्तव में यह कोई जादू नहीं बल्कि बुद्धि का ही चमत्कार है। यदि सोचा जाए तो तीक्ष्ण बुद्धि और उससे किए गए कार्य ही जादू कहलाते हैं। जो रहस्य हमारी समझ में नहीं आता, प्राय: उसे ही हम जादू मान लेते हैं। इसी प्रकार का यह भी जादू है और यह प्राय: शादी के अवसर पर मित्र-मंडली में दिल बहलाने और मनोरंजन के लिए किया जाता है। इसकी सहायता से निम्रलिखित गुप्त प्रश्रों के उत्तर दिए जा सकते हैं। आपकी जेब में कितने रुपए हैं? आपके कितने भाई हैं? आपकी कितनी बहनें हैं? आपने कितने प्रेम किए हैं? आपकी आयु इस समय कितनी है? इसी प्रकार से अ...

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दुनिया का इकलौता मंदिर, जहां स्वयं घटती-बढ़ती है शिव-पार्वती के मध्य की दूरी

देवभूमि हिमाचल में बहुत सारे मंदिर हैं। कांगड़ा में काठगढ़ महादेव मंदिर स्थित है। यह पूरे विश्व का इकलौता मंदिर है जहां शिवलिंग दो भागों में बंटा हुआ है। यह शिवलिंग शिव-पार्वती दो भागों में बंटा है। कहा जाता है कि शिवलिंग के इन दोनों भागों के मध्य की दूरी अपने आप घटती-बढ़ती रहती है। इस मंदिर की स्थापना ज्योतिष के नियमानुसार की गई है। यह मंदिर ग्रहों अौर नक्षत्रों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यहां स्थापित शिवलिंग के मध्य की दूरी स्वयं घटती बढ़ती रहती है। गर्मियों में यह स्पष्ट रुप से दो अलग-अलग भागों में बंट जाता है अौर सर्दियों में एक हो जाता है। इस शिवलिंग को अर्धन...

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